अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के एक शोध में सरयू नदी के पानी में ऐसे जीन पाए गए हैं जो कुछ बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव से बचा सकते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि सरयू में नहाने से इंसानों पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो जाएगा। चिंता का विषय यह है कि यदि ये जीन किसी रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाते हैं, तो संबंधित दवा का असर कम हो सकता है, जिससे प्रभावित व्यक्ति में संक्रमण का इलाज मुश्किल हो जाएगा।
यह शोध अवध विश्वविद्यालय के डॉ. मणिकांत त्रिपाठी, साकेत महाविद्यालय के वनस्पति विभाग के अवधेश शुक्ल और शोधार्थी सदानंद मौर्या द्वारा किया गया। उन्होंने सरयू के पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों के जीन की जांच की। कुल 37 प्रकार के एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन का पता लगाया। ये जीन बैक्टीरिया को कुछ विशेष एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी बनाने में सहायक हो सकते हैं।
शोध के लिए सरयू नदी के तीन अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए गए। एक नमूना लक्ष्मण घाट के पास नदी के किनारे से लिया गया। दो नमूने नदी के बीच से अलग-अलग गहराई पर, जिनमें से एक लगभग 45 सेंटीमीटर गहराई से लिया गया था। पानी की मेटाजीनोमिक सीक्वेंसिंग तकनीक का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों के जीनोम की एक साथ जांच की। विश्लेषण में टेट्रा साइक्लिन, मैक्रोलाइड, फ्लोरोक्विनोलोन जैसी एंटीबायोटिक दवा से जुड़े प्रतिरोधी जीन पाए गए।