अयोध्या। ज्येष्ठ महीने के दूसरे मंगलवार पर रामनगरी में आस्था की लहरें प्रवाहित होती दिखीं। हनुमानगढ़ी जहां, आस्था खुद अपने चरणों से पतित पावन मार्ग प्रशस्त करती है, वहां ज्येष्ठ के दूसरे मंगल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रभात की बेला से ही गगनभेदी जयकारों से अयोध्या नगरी गुंजायमान हो उठी। सुबह हुई मूसलाधार बारिश व दोपहर से लेकर शाम तक प्रचंड धूप भक्तों की आस्था की परीक्षा लेती रही।
बड़ा मंगल पर शहर से लेकर गांव तक हनुमान मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। जय जय जय बजरंग बली...संकट मोचन हनुमान की जय...जैसे उद्घोषों से वातावरण में भक्ति की सुगंध घुल गई। हर दिशा, हर मार्ग, हर द्वार हनुमान के नाम का जप करता प्रतीत हो रहा था। पुरुष, महिलाएं, वृद्धजन और बालक हर कोई आस्था की डोर में बंधा, घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के साथ इस दिव्य पर्व का साक्षी बनने को आतुर रहा।
श्रद्धालुओं ने हनुमान जी को चोला चढ़ाया। प्रसाद व सिंदूर अर्पित किया और उनकी कृपा के लिए विनम्र प्रार्थनाएं कीं। मंदिरों में हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का संगीतमय पाठ गूंजता रहा। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।.शहर के नाका हनुमानगढ़ी, वीर भगवान मंदिर, सहादतगंज हनुमानगढ़ी, देवकाली हनुमानगढ़ी, रिकाबगंज हनुमानगढ़ी सहित अन्य हनुमान मंदिरों में दिन भर पूजन-अर्चन और अनुष्ठानों का दौर चला।