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Ayodhya News: रुश्दी के बाद अब सेन परिवार को साधने की चुनौती

Wed, 06 Mar 2024 11:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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सतीश पाठक
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अयोध्या। इंडिया गठबंधन के लोकसभा प्रत्याशी व सपा के कद्दावर नेता अवधेश प्रसाद जोड़-तोड़ की राजनीतिक के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव से पूर्व अलग-थलग हुए पार्टी के दो कद्दावर नेताओं को सपा में शामिल कराकर उन्होंने इसका अहसास भी करा दिया है, लेकिन पिछले चार चुनाव में लोकसभा प्रत्याशी रहे सेन परिवार को साधना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। फिर भी दो कद्दावर नेताओं को पार्टी से जोड़कर सपा कुनबे का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
रुदौली विधानसभा से दो बार विधायक रहे अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां व सपा सरकार में मंत्री रहे दरियाबाद विधानसभा के विधायक राजा राजीव सिंह के पुत्र रितेश सिंह ने विधानसभा चुनाव से पूर्व ही सपा से नाता तोड़ लिया था। रुश्दी मियां जिले के मुस्लिम वोट बैंक के बड़े चेहरे माने जाते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा से चुनाव लड़ा। मुस्लिम वोटबैंक में बंटवारा होने से सपा को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
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गठबंधन के प्रत्याशी बनते ही अवधेश प्रसाद ने इनके अलगाव से होने वाले नुकसान के पूर्वानुमान से इन्हें साधने के प्रयास तेज किए। इसमें उन्हें सफलता भी हासिल हुई और दोनों कद्दावर नेताओं ने बीते दिनों सपा में घर वापसी कर ली। इससे भविष्य में होने वाले दो बड़े नुकसान की संभावनाओं पर विराम लग गया। लेकिन टिकट कटने से नाराज सेन परिवार को साधना अभी भी अहम है।

जिला पंचायत चुनाव से सेन परिवार को भी साधने की शुरू की थी कोशिश
अवधेश प्रसाद ने सेन परिवार को साधने की कोशिश बहुत पहले से ही शुरू कर दी थी। बीते जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उन्होंने सेन परिवार की बहू इंदुसेन को प्रत्याशी बनाने में खूब पैरवी भी की थी। इसका परिणाम रहा कि उन्हें टिकट भी मिला, लेकिन वह जीत नहीं सकीं।

पिछड़ों के बड़े नेता थे मित्रसेन यादव
तीन बार सांसद व सात बार विधायक रहे मित्रसेन यादव पिछड़ों के बड़े नेता माने जाते थे। अन्य पिछड़ों के साथ उनकी यादव वोटबैंक में मजबूत पकड़ थी। उनके निधन के बाद उनके पुत्र व पूर्व मंत्री आनंदसेन यादव को सपा ने 2019 में प्रत्याशी बनाया था, जिसमें उन्होंने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। ऐसे में यदि उन्होंने राह अलग की तो सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष की बैठक में भी नहीं शामिल हुए थे आनंदसेन
बीते दिनों टिकट वितरण के बाद सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी पूर्व विधायकों की बैठक बुलाई थी। उसमें भी आनंदसेन यादव शामिल नहीं हुए थे। इससे भी उनकी नाराजगी को लेकर तमाम चर्चाएं हुई थीं।
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