अयोध्या। 16 वर्षीय दलित किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने के बाद शादी के लिए विवश करके दुष्कर्म करने के आरोपी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया। यह फैसला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम अभिषेक कुमार बगड़िया ने शुक्रवार को सुनाया। वादिनी को मिथ्या सूचना के आधार पर मुकदमा दर्ज कराने के मामले में पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत प्रकीर्ण वाद पंजीकृत करके नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
बचाव पक्ष से अभियुक्त रोहित चौरसिया के अधिवक्ता सुधाकांत त्रिपाठी ने तर्क दिया कि कोई भी साक्ष्य घटना को साबित नहीं कर रही है। वादिनी ने भी रोहित के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाने से इन्कार किया है। बयान दिया है कि लेखक ने गलती से नाम लिख दिया। उसने अपनी बेटी को पढ़ाई-लिखाई के लिए डांटा था, जिससे वह घर से चली गई थी। अभियोजन कथानक के मुताबिक, थाना कोतवाली नगर के उसरू की रहने वाली किशोरी को छह मार्च, 2023 को उनके गांव में किराये पर रह रहे रोहित चौरसिया, शनि यादव व मनोज चौरसिया ले गए थे। किशोरी की मां की तहरीर पर अपहरण, एससी-एसटी व पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान शनि यादव व मनोज चौरसिया को घटना में शामिल नहीं पाया गया।
विवेचक ने अभियुक्त रोहित चौरसिया के विरुद्ध दुष्कर्म, अपहरण, विवाह के लिए विवश करने, लैंगिक हमला करने व एससी-एसटी सहित कई गंभीर धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष से सात गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश ने सबूत के अभाव में और वादिनी मुकदमा के बयान बदलने के आधार पर रोहित चौरसिया को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।