अयोध्या। राम नगरी में होली का उल्लास अब मंदिरों की परिधि से निकलकर शहर की गलियों तक पहुंचने को तैयार है। शुक्रवार को पड़ने वाली रंगभरी एकादशी के साथ ही अयोध्या में होली का रंग चटख हो जाएगा। परंपरा के अनुसार हनुमानगढ़ी से नागा-साधुओं का विशेष जुलूस निकलेगा, जो विभिन्न मठ-मंदिरों में जाकर संत-महंतों और श्रद्धालुओं को होली का आमंत्रण देगा। रामनगरी में होली का आध्यात्मिक रंग बिखरता है। यहां आराध्य के संग होली खेलने की परंपरा है। रंगभरी एकादशी से अयोध्या में होली का रंग चटख हो जाता है। इस बार रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। एकादशी पर हनुमानगढ़ी से जुलूस निकालने वाले नागा साधु घर-घर, मठ-मंदिरों में होली का आमंत्रण देते हैं। इसके बाद पांच दिनों तक रामनगरी में रंगोत्सव मनाया जाता है। रंगभरी एकादशी पर हनुमानगढ़ी से नागा साधु हनुमान जी के निशान के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते हुए शोभा यात्रा निकालेंगे। शोभायात्रा से पहले हनुमानगढ़ी में निशान पूजन किया जाएगा। हनुमंतलला के सभी आभूषणों व अस्त्र-शस्त्र को साफ किया जाएगा। आभूषणों को नए धागे में पिरोया जाएगा।
इसके बाद हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत निशान पूजन करेंगे। इस पूजन के बाद सबसे पहले हनुमंतलला को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद नागा-साधु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लाकर होली की मुनादी करेंगे। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भी इस परंपरा के रंग में बड़े ही उत्साह से रंगने को आतुर नजर आते हैं। जुलूस की शक्ल में मंदिर से शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा के दौरान नागा और साधु पंचकोसी परिक्रमा भी करते हैं। निशान के साथ निकले साधु मंदिरों में होली का निमंत्रण देंगे। नागा-साधु रास्ते में अस्त्र-शस्त्रों से करतब करते और होली के भजनों पर थिरकते चलेंगे। सरयू तट पर निशान की पूजा-अर्चना भी की जाएगी।