अयोध्या। राम नगरी की ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा शुक्रवार से शुरू होगी। इसके लिए साधु-संतों का जत्था बृहस्पतिवार को अयोध्या से मखौड़ा के लिए रवाना होगा, जहां से विधिवत परिक्रमा का शुभारंभ किया जाएगा। 22 दिनों तक चलने वाली यह परिक्रमा पांच जिलों के 107 गांवों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल होंगे।
परिक्रमा का मार्ग रामनगरी की पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत बस्ती जिले के मखधाम (मखौड़ा) से होती है। यह यात्रा विभिन्न पौराणिक स्थलों से गुजरते हुए अंत में अयोध्या पहुंचकर पूर्ण होती है। रास्ते में कुल 21 प्रमुख पड़ाव निर्धारित हैं। अयोध्या में विहिप के हनुमान मंडल और श्री अयोध्या धाम चौरासी कोस परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान के तत्वावधान में इस परिक्रमा का आयोजन किया जाता है। अवध धाम हनुमान मंडल समिति के नेतृत्व में साधु-संत कारसेवक पुरम में एकत्र होंगे। महंत गयादास के नेतृत्व में रायगंज स्थित नरोत्तम भवन से परिक्रमा का श्रीगणेश किया जाएगा। दोनों संस्थाओं की ओर से होने वाली परिक्रमा में एक हजार से अधिक साधु-संत शामिल होंगे।श्री अयोध्या धाम चौरासी कोस परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत गयादास के अनुसार 84 कोसी परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है।धार्मिक ग्रंथों में अयोध्या की तीन प्रमुख परिक्रमा का उल्लेख मिलता है। चौदह कोसी, पंचकोसी और 84 कोसी परिक्रमा। चौदह कोसी और पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या की सीमाओं में होती हैं, जबकि 84 कोसी परिक्रमा व्यापक क्षेत्र को समेटे हुए है।