अयोध्या। दीवानी न्यायालय परिसर अयोध्या में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 85 हजार 350 मुकदमों का निस्तारण किया गया। साथ ही 12 करोड़ 19 लाख 80 हजार 954 रुपये की वसूली की गई।
अपर जिला जज / नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत दीपक यादव के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में 80 हजार वादों के निस्तारण का लक्ष्य लेकर तैयारी की गई थी, जिसमें हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहे हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी के अनुसार वर्चुअल कोर्ट की पीठासीन अधिकारी निवेदिता सिंह की ओर से सबसे अधिक 35 हजार 459 मुकदमों का निस्तारण किया गया। पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की ओररेस 85 याचिकाओं को सुलह समझौता के आधार पर निस्तारित किया गया जिसमें छह करोड़ 51 लाख 19 हजार 807 रुपये प्रतिकर जमा कराया गया।
राजस्व मामलों से संबंधित 30 हजार 996 वाद जिले के राजस्व न्यायालयों की ओर से निस्तारित किए गए। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन पर डॉक्टर बृज किशोर होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज की ओर से स्वास्थ्य कैंप भी लगाया गया था। इससे पहले दीवानी न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने किया।
लोक अदालत में लगे कैंपों का जिला जज ने विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव प्रिया सक्सेना व नोडल अधिकारी एडीजे दीपक यादव, एडीजे प्रदीप कुमार सिंह के साथ निरीक्षण किया गया। संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय महेंद्र पासवान ने किया। इस मौके पर न्यायिक अधिकारी सुरेंद्र मोहन सहाय, विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन रजत वर्मा, एडीजे प्रदीप कुमार सिंह, एसीजेएम सतीश कुमार मगन, स्वर्ण माला सिंह, रूपाली सिंह आदि की मौजूदगी रही।
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पारिवारिक न्यायालय में 57 मुकदमों का निस्तारण
पारिवारिक न्यायालय में सुलह समझौता के लिए 63 प्राथमिकी दर्ज पेश किए गए जिनमें से 57 मुकदमों का निस्तारण किया गया। पारिवारिक न्यायालय में चल रहे पति-पत्नी के बीच विवाद को समाप्त कराकर 11 जोड़ों को सुलह-समझौता के साथ रहने के लिए न्यायालय से विदाई की गई।
दो साल से अलग रह रहे हरि नाथ तिवारी व सोनी को एक साथ रहने के लिए राजी किया गया। जिनकी विदाई अदालत से ही की गई। हरिनाथ व सोनी को फिर से एक साथ रहने के लिए प्रेरित करने में अधिवक्ता मुन्ना सिंह व विकास श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा।
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जिला जज ने बताया लोक अदालत का महत्व
जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने लोक अदालत का महत्व समझाते हुए कहा कि मुकदमों में फैसले से एक पक्ष को घुटन होती है। सुलह समझौता से वाद तो समाप्त होते ही हैं पक्षों में प्रेम भी हो जाता है। न कोई वकील न कोई खर्च, टूटे रिश्ते फिर से जुड़ जाते हैं। न हार न जीत की कोई बात है। टूटे रिश्ते फिर से जुड़ जाते हैं....रचना सुनाकर सुलह समझौता में सामूहिक योगदान की अपील की।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा व लीडिंग बैंक के प्रबंधक गणेश यादव ने भी राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए मिलकर प्रयास किए जाने पर जोर दिया।