अयोध्या। गणतंत्र के 76वें वर्ष पूरे होने के साथ ही अयोध्या का सफर एक जीवंत दस्तावेज। जहां कभी सीमित सुविधाएं थीं, आज वहीं विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन का केंद्र आकार ले चुका है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि 1950 का जिला फैजाबाद अब जिला अयोध्या के नाम से जाना जाता है। पहले गणतंत्र से लेकर अब तक अयोध्या की आबादी में छह गुना की वृद्धि हुई।
गणतंत्र के शुरुआती वर्षों में अयोध्या एक शांत धार्मिक नगर थी। तीर्थाटन स्थानीय स्तर तक सीमित था। संकरी सड़कें, आवागमन के साधनों की कमी, ठहराव के लिए गिने-चुनी धर्मशालाएं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। रोजगार के सीमित साधन थे, खेती-किसानी ही आय का जरिया होती थी। सरयू तट पर आस्था थी, पर सुविधाओं का अभाव साफ झलकता था। आज अयोध्या का कलेवर पूरी तरह बदल चुका है। राम मंदिर के भव्य स्वरूप ने वैश्विक मानचित्र पर शहर को नई पहचान दी है। चौड़ी और सुगम सड़कें, आधुनिक घाट, सुसज्जित मंदिर परिसर, स्मार्ट सिटी सुविधाएं, बेहतर स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था सब मिलकर अयोध्या को आधुनिक तीर्थ-नगरी बनाते हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी हैं। रोजगार की अपार संभावनाओं ने जन्म लिया है।
अधोसंरचना में आ चुका है आमूलचूल परिवर्तन
इतिहासकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे बताते हैं कि 1950 में लोगों को मिडिल तक की शिक्षा के लिए कई-कई किलोमीटर जाना पड़ता था लेकिन पिछले 76 साल में हर ग्राम पंचायत में स्कूलों की स्थापना हो गई है। जिले में 3300 से अधिक स्कूल-कॉलेज हैं। उच्च शिक्षा के लिए आस-पास के जिले से भी छात्र यहां आते हैं। गांवों के ज्यादातर घरों में बिजली की सुविधा तो स्वास्थ्य के लिए गांव-गांव एएनएम सेंटर और सीएचसी, पीएचसी की स्थापना के साथ डॉक्टरों की तैनाती हो गई है। मेडिकल कॉलेज बन गया है। पहले जहां संपर्क साधन चुनौती थे, वहीं अब हाईवे, बाईपास, बेहतर रेल कनेक्टिविटी और हवाई संपर्क ने दूरी मिटा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट बन गए हैं। आज अयोध्या में 100 से अधिक छोटे-बड़े होटल हैं। स्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थायी संबल मिला है।
अयोध्या का बदलाव एक नजर में
सुविधा-1950-2026
आबादी-पांच लाख-31 लाख
थाना-चार-19
अस्पताल-दो-55
स्कूल-कॉलेज-50-3300
शहर में वार्ड-08-60
( सभी आंकड़े सरकारी वेबसाइट के आधार पर)