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Ayodhya News: उच्च जोखिम गर्भधारण की श्रेणी में मिलीं 675 महिलाएं

Wed, 01 Oct 2025 08:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। तमाम जागरूकता अभियानाें और स्वास्थ्य विभाग की कवायदों के बावजूद गर्भवती महिलाएं सेहत के प्रति लापरवाही बरत रही हैं। इन्हीं लापरवाहियों के कारण इस वर्ष में 675 महिलाएं उच्च जोखिम गर्भधारण की श्रेणी में पहुंची हैं। हालांकि, समय पर जानकारी होने से उन्हें खतरे से बाहर निकाला गया है।
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माह में चार दिन प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन होता है। इस दौरान जिला महिला अस्पताल के अलावा, मेडिकल कॉलेज व सभी 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए विशेष शिविर लगता है। आशा बहू और एएनएम के सहयोग से महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच कराई जाती है। जिन केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं है, वहां से अनुबंधित निजी केंद्र भेजकर निशुल्क जांच की सुविधा दी जाती है।



मौजूदा वर्ष में इन केंद्रों पर 27,875 महिलाएं आई हैं, जिनमें 675 महिलाओं में खून की मात्रा बेहद कम मिली है। इन्हें अस्पतालों में भर्ती करके खून की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन-सुक्रोज चढ़ाया गया। कुछ महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत निशुल्क खून उपलब्ध कराया गया।
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मसौधा और मिल्कीपुर में चिह्नित हुईं सर्वाधिक महिलाएं



ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाएं इस मामले में अधिक लापरवाह दिखी हैं। इनमें सीएचसी मसौधा और मिल्कीपुर क्षेत्र में सर्वाधिक 80 और 79 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दायरे में मिली हैं। इसके अलावा खंडासा और पूराबाजार क्षेत्र में 76-76, मया बाजार में 60, सोहावल में 47, जिला महिला अस्पताल में 38, मेडिकल कॉलेज में 42 महिलाओं में खून की कमी मिली है। वहीं, गतवर्ष इसी अवधि तक 464 महिलाएं इस श्रेणी में मिली थीं।







जच्चा-बच्चा की जान का रहता है खतरा



मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृतिका वर्मा ने बताया कि खून की कमी से प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की जान का खतरा रहता है। कई बार प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होता है। मां की ह्रदयगति भी रुक सकती है। बच्चे के कमजोर होने का खतरा रहता है। इसलिए महिलाओं को गर्भधारण के बाद ही खून की जांच करानी चाहिए और खानपान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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