अयोध्या। रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालु अब राम मंदिर की भव्यता के साथ उसके पुरातात्विक इतिहास से भी रूबरू हो सकेंगे। राम कथा संग्रहालय में रामजन्मभूमि परिसर की खोदाई के दौरान मिले 216 पुरावशेषों को संरक्षित और प्रदर्शित करने की तैयारी है। इनमें चर्चित विष्णुहरि शिलालेख समेत मंदिर परिसर से मिले स्थापत्य अवशेष, प्रतिमाओं के खंड और अन्य पुरावस्तुएं शामिल हैं।
रामजन्मभूमि परिसर में विभिन्न चरणों की खोदाई और निर्माण कार्य के दौरान करीब 300 पुरावशेष सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें से 216 को राम कथा संग्रहालय में प्रदर्शित करने की योजना है। शेष पुरावशेषों को राम मंदिर परिसर में ही निकट भविष्य में सुरक्षित व प्रदर्शित करने की योजना है। श्रीरामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉक्टर संजीव सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र लिखकर 128 पुरावशेष उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। ये पुरावशेष वर्तमान में मंदिर परिसर में सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
वहीं, 88 पुरावशेष पहले से राम कथा संग्रहालय के पास सुरक्षित हैं। इन्हें भी प्रस्तावित गैलरी में शामिल किया जाएगा। रामजन्मभूमि परिसर में हुई पुरातात्विक खोदाई के दौरान विभिन्न स्तरों पर दीवारों, फर्श, ईंटों की संरचनाओं, स्तंभ आधारों और अन्य वास्तु अवशेष मिले थे। अलग-अलग कालखंडों से संबंधित सिक्के, टेराकोटा वस्तुएं और अन्य सामग्री भी मिली थी। इन्हीं पुरावशेषों को अब संग्रहालय में संरक्षित कर उनके महत्व को लोगों के सामने लाने की तैयारी है।
इनसेट
शिलालेख से स्थापत्य अवशेष तक दिखेगा इतिहास
प्रस्तावित संग्रह में विष्णुहरि शिलालेख प्रमुख आकर्षण होगा। संग्रहालय में इसे प्रदर्शित करने के साथ उसके ऐतिहासिक संदर्भ और उपलब्ध पुरातात्विक जानकारी भी दर्शकों के सामने रखने की तैयारी है। विवादित स्थल पर खोदाई के दौरान 12वीं शताब्दी के हरि-विष्णु मंदिर का उल्लेख करने वाला शिलालेख युक्त एक पत्थर की पट्टिका मिली थी। इसे 11वीं-12वीं शताब्दी ईस्वी की शुद्ध और शास्त्रीय नागरी लिपि में उत्कीर्ण किया गया है। शिलालेख में राम के अवतार का भी उल्लेख है।
संग्रहालय में संरक्षित होंगे यह अवशेष
पिलर बेस/स्तंभ आधार- करीब 50 स्तंभ आधार। इनके नीचे ईंटों और ऊपर पत्थर के ब्लॉक।
कसौटी पत्थर के सात स्तंभ, लाल बलुआ पत्थर के छह स्तंभ, प्राचीन शिवलिंग, नक्काशीदार पत्थर के छह स्तंभ
-वास्तु अवशेष- स्तंभ, पिलास्टर, टूटे दरवाजे के चौखट के हिस्से, लिंटल, ब्रैकेट आदि।
-अलंकरणयुक्त पत्थर-अमलक, घट-पल्लव शैली के स्तंभ, कीर्तिमुख, कमल की आकृति, श्रीवत्स चिह्न और पत्तियों की नक्काशी वाले वास्तु खंड।
-मूर्तिकला के अवशेष- मानव एवं पशु आकृतियों वाली टेराकोटा प्रतिमाएं/मूर्तियां , देवी-देवताओं से संबंधित खंड।
-टेराकोटा सामग्री- टेराकोटा के पहिए, खिलौना/पशु आकृतियां, मनुष्य की आकृतियां, मनके।
-शिलालेख-सबसे चर्चित अवशेषों में विष्णुहरि शिलालेख, इसके अलावा ऐसे पत्थर जिन पर अरबी लिपि में धार्मिक आयतें लिखी हैं।
सिक्के- विभिन्न कालों के सिक्कों में गुप्तकाल से संबंधित ‘श्री चंद्र’ अंकित तांबे के सिक्के आदि।