अयोध्या। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान विभिन्न कार्यों में नगर निगम पर दो सौ करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे हैं। उप निदेशक, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने यह आरोप लगाए हैं। इस मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
मंगलवार को सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में पूर्व मंत्री ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान नगर निगम में नेता और अधिकारियों के गठजोड़ से दो सौ करोड़ से अधिक की लूट हुई है। ऑडिट रिपोर्ट पढ़ते हुए उन्होंने बताया कि नगर निगम के विभिन्न कर्मचारियों को अस्थायी अग्रिम दिया गया था। बार-बार आपत्ति के बावजूद अग्रिमों का समायोजन नहीं किया गया, जिससे 2.18 करोड़ रुपये की क्षति हुई।
इसके अलावा विज्ञापन अनुज्ञा शुल्क न जमा कराने से 1.40 करोड़, ठेका धनराशि नहीं जमा कराने से 2.77 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई। सफाई श्रमिकों को आरक्षित रखने से 33.52 लाख का दुरुपयोग हुआ। अधिक लंबाई में सफाई कार्य दर्शाकर 96.25 लाख, बिना कार्यादेश के अनुबंध तिथि से पूर्व का बिल प्रस्तुत करके 1.31 करोड़, कार्यादेश के विपरीत अधिक संख्या में चालकों को दिखाकर 59,435, यातायात लाइट स्थापना पर 4.46 करोड़ का अधिक भुगतान किया गया।
अनुबंध के विपरीत बिना कार्य सत्यापन के 41.92 लाख, बिना वस्तु की प्रकृति, मात्रा और दर के निर्धारण के 36.51 लाख का अनियमित भुगतान किया गया। एक ही समय में एक से अधिक वाहनों की तौल दिखाकर 8.75 लाख रुपये निकाले गए। उन्होंने कहा कि इन भ्रष्टाचारियों पर महापौर ने आवाज नहीं उठाई, इससे उनकी संलिप्तता जाहिर है। केंद्रीय एजेंसी कैग से पूरे मामले की जांच कराई जाए। कुछ अधिकारियों के कार्यकाल में हुए सभी विकास कार्यों की जांच हो। प्रेसवार्ता में जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव, शिवांशु तिवारी व अन्य मौजूद रहे।
ब्लैक लिस्टेड फर्म को 6.05 करोड़ का भुगतान
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कान्हा गौशाला निर्माण के लिए चुनी गई प्रताप हाइट्स को मंडलायुक्त ने काली सूची में डालने का आदेश दिया था। इसके बावजूद इस फर्म को 6.05 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, एक अन्य मामले में बिना बिल के अलग-अलग फर्मों को 9.98 लाख रुपये का अनियमित भुगतान किया गया।
बिना परीक्षण के भेज दी आपत्ति
अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ ने कहा कि सभी विभागों में आडिट एक सामान्य प्रक्रिया है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2023-2024 की आडिट आपत्तियां नगर निगम को प्राप्त हुई हैं। इनका परीक्षण कराते हुए सक्षम स्तर से उनका उत्तर तैयार कर आडिट विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि तकनीकी रूप से आडिट आपत्तियां अधिकांशत: पत्रावलियों का सम्यक परीक्षण किए बिना प्रेषित की गई हैं। आपत्तियों के निस्तारण के लिए तीन माह का समय दिया गया है। निर्धारित समय सीमा में आपत्तियों का जवाब आडिट विभाग को प्रेषित कर निस्तारण करा लिया जाएगा।