सोहावल/शुजागंज। सरयू का जलस्तर छह सेमी घटा है। बृहस्पतिवार शाम को नदी का जलस्तर 93.040 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 92.730 मीटर है। रुदौली में 845 और शुजागंज में 850 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं पटरंगा माझा में लगभग 57 बीघे से अधिक फसल पानी में डूब गई है या तो कटान में बह गई है। प्रशासन की ओर से राहत शिविर, भोजन, नाव और स्टीमर की व्यवस्था की गई है, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों के सामने आपात स्थिति में आवागमन और फसलों के नुकसान की बड़ी समस्या बनी हुई है।
बाढ़ से 845 परिवार प्रभावित, आठ घरों में घुसा पानी
रुदौली क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से करीब 845 परिवार और 3300 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। नूरगंज, सुलेमपुर, उधरोरा, महगू पुरवा, सरायनासीर, बरई, अब्बुपुर और कैथी खास समेत कई गांव प्रभावित हैं। पसैया गांव में बाढ़ का पानी आठ घरों में घुस गया है। रामकरन, कुसमा, रामचंद्र, कुमारी प्रवीन, मधु, रघुराज, बुधराम और रामसरन के परिवार बंधे पर पन्नी तानकर रहने को मजबूर हैं। गृहस्थी का सामान भी पन्नी के नीचे रखा गया है।
रामदुलारी ने बताया कि उनका मूल घर मरौचा गांव में था। करीब दस वर्ष पहले सरयू की कटान में मकान नदी में समा गया। इसके बाद परिवार को रहने के लिए भूमि नहीं मिली। तब से करीब छह परिवार बंधे के पास झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं।
रामदुलारी ने बताया कि इस बार घर में पानी घुसने के बाद पूरा सामान बंधे पर पन्नी के नीचे रखना पड़ा है। एक बार राशन किट मिली थी, लेकिन अब राशन खत्म होने को है और दोबारा राहत सामग्री नहीं मिली।
एसडीएम विनोद गुप्ता ने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों में अब तक 250 राशन किट वितरित की जा चुकी हैं। राहत सामग्री से छूटे परिवारों को भी राशन किट उपलब्ध कराई जाएगी। पसैया में रह रहे परिवारों की जांच कराई जाएगी।
राहत शिविर में भोजन के लिए पहुंच रहे बाढ़ पीड़ित
सोहावल क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित मांझा कला गांव में प्रशासन ने राहत व्यवस्था तेज कर दी है। बृहस्पतिवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व, एसडीएम गजेंद्र सिंह, तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह और नायब तहसीलदार रेशु जैन ने गांव व राहत शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ग्रामीण गंगाराम यादव ने बताया कि अधिकांश पुरुष दिन में मजदूरी के लिए बाहर चले जाते हैं और सुबह-शाम भोजन व नाश्ते के लिए राहत शिविर पहुंचते हैं। घरों से बाहर निकाले गए पशुओं के लिए प्रशासन की ओर से चारा-भूसा दिया जा रहा है। ग्रामीण कमलेश यादव ने बताया कि महिलाएं घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं और घर की सुरक्षा के लिए वहीं रह रही हैं।
एसडीएम ने बताया कि गांव से जुड़े सभी मजरों में नाव उपलब्ध कराई गई है और पांच स्टीमर निशुल्क आवागमन के लिए लगाए गए हैं। शिविर में बिजली, पानी, शौचालय और ठहरने की व्यवस्था है। सुबह-शाम करीब 150 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। पशु और लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सकों की टीमें भी लगाई गई हैं।
57 बीघे डूबी फसल
शुजागंज क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित पटरंगा माझा, कैथी और मरौचा के करीब 850 गांवों के 5000 ग्रामीणों के लिए आवागमन बड़ी चुनौती बना हुआ है। सामान्य स्थिति में नाव से आवाजाही हो रही है। कैथी के पुत्ती लाल ने बताया कि रात में किसी की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचने में काफी समय लग सकता है।
बाढ़ के साथ कटान ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। पटरंगा मांझा में करीब एक दर्जन ग्रामीणों की 25 से 35 बीघा गन्ने और धान की फसल नदी की धारा में समा गई। राजेंद्र का छप्पर का मकान और करीब 13 बीघा फसल कटान की भेंट चढ़ गई। ननके निषाद की सात बीघा फसल नदी में समा चुकी है और कटान उनके मकान से करीब 200 मीटर दूर तक पहुंच गया है।