- 38 स्थानों पर मिला दुर्लभ पांडुलिपियों का विशाल भंडार, कई संस्थानों में 50 हजार से एक लाख तक पांडुलिपियां संरक्षित
अयोध्या। भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहरों के संरक्षण की दिशा में अयोध्या से बड़ी उपलब्धि सामने आई है। पांडुलिपि सर्वेक्षण के पहले चरण में जिले के 38 स्थानों पर कुल 10.29 लाख पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। अब इस अभियान के दूसरे चरण का सर्वे जल्द शुरू होने जा रहा है, जिसमें और अधिक संस्थानों व निजी संग्रहों को शामिल किया जाएगा।
पहले चरण के सर्वे में मठों, मंदिरों, आश्रमों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का विवरण जुटाया गया। कई स्थानों पर 50 हजार से लेकर एक लाख तक पांडुलिपियां मिली हैं। इनमें वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, पुराण, दर्शन, ज्योतिष, आयुर्वेद, व्याकरण, काव्य और अन्य प्राचीन विषयों से संबंधित दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं।
सर्वेक्षण का उद्देश्य पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण और उनके संरक्षण की योजना तैयार करना है। दूसरे चरण में ऐसे नए स्थानों की खोज की जाएगी, जहां अब तक सर्वे नहीं हो सका है। साथ ही निजी संग्रहकर्ताओं और धार्मिक संस्थानों के पास सुरक्षित पांडुलिपियों का भी दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे चरण के पूरा होने के बाद अयोध्या में संरक्षित पांडुलिपियों की संख्या में और बड़ा इजाफा हो सकता है। इसके बाद इन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और शोध कार्य को गति दी जाएगी, जिससे अयोध्या धार्मिक नगरी के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में भी नई पहचान हासिल करेगी।