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औरैयाः कला और किसानी में अलग छाप छोड़ युवाओं ने बनाई पहचान

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मोनू शाक्य। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। राष्ट्र के निर्माण और विकास में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। आज के दौर में तमाम युवा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों सुधार कर आगे बढ़ रहे हैं। कइयों ने गांव से निकल कर देश विदेश में पहचान बनाई तो कुछ ने शहर से आकर गांव में एक अलग छाप छोड़ दी। कुछ कर गुजरने की ललक और उनके आत्मविश्वास ने उन्हें एक अलग पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है। आज वह जिले की पहचान बने हुए है। कई युवा उनसे सीख लेकर अपने को स्वावलंबी और समाज सुधार के साथ सोच बदल रहे हैं। युवा दिवस पर भी युवाओं को समाज के कई मुद्दों पर आगे लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
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किसानी कर युवाओं के लिए बने मिसाल
बिधूना ब्लाक के रामपुर बामपुर निवासी मोनू शाक्य ने स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2019 में दिल्ली में प्राइवेट नौकरी की। कोरोना काल में रोजगार का संकट खड़ा हुआ तो वह घर लौट आए। मोनू बताते हैं कि इसी बीच उन्होंने कुछ किताबें पढ़ीं और कई वेबसाइट पर जाकर खेती किसानी के गुर सीखे। उन्होंने हिमाचल, हरियाणा जैसे प्रदेश में उगने वाली लाल, पीली, हरी शिमला मिर्च के बारे में जानकारी जुटाई और अपने खेतों को तैयार कर शिमला मिर्च की खेती करनी शुरू की। पांच बीघा में खेती कर उसने प्रति माह लाखों कमाने शुरू कर दिए। अब वह हर सीजन में मिर्च तैयार कर दिल्ली, लखनऊ, कानपुर भेज रहे हैं। प्रगतिशील किसानों की श्रेणी में पिछले वर्ष जिले स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं। जिले के तमाम युवा उनसे खेती के टिप्स लेते हैं।
मजाक और जुनून के बीच पाई सफलता
फफूंद कस्बा निवासी शिवा शुक्ला ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद फिल्मी जगत में जाने का मन बनाया। बताते हैं कि जब उन्होंने अभिनेता बनने की इच्छा जताई तो आसपास के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। फिर भी उन्होंने अपने इरादे को मजबूत रखा। दिल्ली व लखनऊ जाकर रंगमंच से अपना नाता जोड़ा। वर्ष 2018 में उन्हें बीएनए संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा नाटक वी आर लाइक दिस ओनली में उनके काम के लिए सम्मानित किया गया था। इस बीच उन्होंने वेब-फिल्म सीतापुर: द सिटी ऑफ गैंगस्टर्स में नायक के सबसे अच्छे दोस्त की भूमिका अदा कर सबको चौंका दिया। शिवा का फिल्मी सफर मिमिक्री करने से शुरू हुआ। वर्ष 2014 में शिवा शुक्ला ने 11 साल की आयु में लखनऊ से एक रंगमंच के अभिनेता के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। वर्ष 2018 में लघु फिल्म सॉरी मॉम में काम किया। जो नशीली दवाओं की लत के विषय पर आधारित थी। वर्तमान में वह महान क्रांतिकारी आदिवासी नेता बिरसा मुंडा पर आधारित फिल्म के लिए काम कर रहे हैं। इसकी स्क्रिप्ट पर काम अंतिम चरण में है।
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शार्ट फिल्म व फाइन आर्ट से बनाई अलग पहचान
दिबियापुर के गेल गांव निवासीआकाश राजपूत पुत्र जसवीर राजपूत फाइन आर्ट व शार्ट फिल्म बनाने में बहुत शौक रखते हैं। इस वजह से आकाश दिल्ली स्थित टॉप यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया से एमएफए मास्टर इन फाइन आर्ट्स कर चुके हैं। उन्होंने अपने गुरु से लेकर अधिकारियों तक की पेंटिंग बनाई है। शार्ट फिल्म से लगाव के कारण अब तक कई शार्ट फिल्में बना चुके हैं। उन्होंने अपनी शार्ट फिल्मों के जरिए देश में कई जगह जिले का गौरव बढ़ाया है। उनकी शार्ट फिल्म इंसीजर ने हरियाणा फिल्म फेस्टिवल में सुर्खियां बटोरीं तो गोवा फिल्म फेस्टिवल में माय लाइफ एज ए स्नैल(घोंघे की आत्मकथा) ने बेस्ट फिल्म अवार्ड जीता। इसके बाद बिहार में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के सीनियर वर्ग में बेस्ट फिल्म अवार्ड पाया है। आकाश ने 13 मिनट को इस फिल्म के जरिए घोंघे के जीवन व आत्मकथा का वास्तविक चित्रण किया है। फिलहाल आकाश दिल्ली को डीएसई यूनिवर्सिटी में गेस्ट लेक्चरर के रूप में डिजिटल मीडिया एंड डिजाइन के क्लास भी ले रहे हैं।

युवा अभिनेता शिवा शुक्ला। संवाद- फोटो : AURAIYA

आकाश राजपूत- फोटो : AURAIYA

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