अछल्दा (औरैया)। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को पेश कर चुकीं हैं। इसमें महंगाई पर लगाम न लगने से जहां महिलाएं नाखुश हैं। वहीं आयकर छूट की सीमा पांच लाख तक नहीं बढ़ने, पुरानी पेंशन बहाली न होने से कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी है। बजट पर शिक्षकों और गृहणियों ने अपनी राय दी है।
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महंगाई को लेकर कोई पहल नहीं हुई
सोना-चांदी पर छह फीसदी कस्टम ड्यूटी घटी है। इससे सोना-चांदी सस्ता होने की उम्मीद है। यह महिलाओं के लिए अच्छी बात है। महंगाई को लेकर बजट में कोई सार्थक पहल नहीं हुई है। इससे निराशा का भाव है।- मंजू देवी, गृहणी
रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ रहीं हैं
केंद्रीय बजट में महंगाई को कम करने के लिए कुछ भी नहीं किया गया। रसोई गैस की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। बजट में डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए था। ताकि डीजल और पेट्रोल के दाम में कमी आए।- प्रीति देवी, गृहणी
पांच लाख रुपये की आय को टैक्स मुक्त रखना चाहिए था
कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार का बजट निराशजनक है। कम से कम पांच लाख रुपये तक की आय को टैक्स मुक्त रखना चाहिए था। इससे लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी।
- संदीप झा, शिक्षक, कंपोजिट विद्यालय सेऊपुर
पुरानी पेंशन को लेकर कुछ नहीं किया गया
केंद्रीय आम बजट में नए टैक्स स्लैब जारी किए गए हैं। बजट में पुरानी पेंशन को लेकर कुछ भी नहीं किया गया है, इससे निराशा हुई है।- प्रहृलाद नारायण ओमर, शिक्षक कंपोजिट विद्यालय नल्हूपुर