औरैया। परिषदीय व सहायता प्राप्त जूनियर स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना में लापरवाही बरतना प्रधानाध्यापकों को भारी पड़ सकता है। विभाग प्रति माह 10 स्कूल से सैंपल एकत्र करेगा। तैयार भोजन की प्रयोगशाला से जांच कराकर गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाएगा। सभी प्रधानाध्यापकों को स्कूल बंद होने तक मिड-डे मील का सैंपल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।
सर्वे शिक्षा अभियान के तहत जिले के 1265 परिषदीय व 54 सहायता प्राप्त विद्यालयों में पंजीकृत कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिया जाता है। स्कूलों में रसोइयों की तैनाती के साथ कोटे की दुकान से राशन देते हुए कंवर्जन कॉस्ट का भुगतान किया जाता है। मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण ने एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरटिंग प्रोसीजर) अभियान चलाया है।
इसके तहत बच्चों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर विशेष नजर रहेगी। विभाग प्रतिमाह रैंडम के आधार पर योजना से आच्छादित 10 स्कूलों की रसोई से नमूने लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम की मदद से प्रयोगशाला से जांच कराएगा। प्रधानाध्यापक को दो वयस्क व्यक्तियों को भोजन चखाने के बाद गुणवत्ता संतोषजनक होने पर बच्चों को वितरित करने को कहा गया है।
बीएसए अनिल कुमार ने बताया कि स्कूल स्तर पर भोजन चखने के लिए दिवसवार रोस्टर तैयार किया जाएगा। प्रतिदिन स्कूल में भोजन चखने वाले व्यक्ति का नाम एवं पदनाम अंकित किया जाएगा। इसका लेखा जोखा प्रधानाध्यापक को रखना होगा। विद्यालय में भोजन शेड उपलब्ध न होने की स्थिति में बच्चों को स्वच्छ व साफ-सुथरे स्थान पर चटाई पर पंक्तिबद्ध रूप से उचित दूरी पर बैठाकर सौहार्दपूर्ण वातावरण में भोजन परोसा जाएगा।
इतना ही नहीं स्कूल में तैयार भोजन स्कूल बंद होने तक सुरक्षित रखना होगा। जांच में एमडीएम योजना के तहत तैयार भोजन की गुणवत्ता प्रभावित मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की जाएगी।