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Auraiya News: रोजा रख बच्चे भी कर रहे इबादत, बड़ों से पा रहे स्नेह

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संवाद न्यूज एजेंसी
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अजीतमल। रमजान का माह इबादत का है। रमजान में कोई भी इबादत में पीछे नहीं रहना चाहता है। हर कोई रोजा रखकर नमाज अदा कर रहा है जो समय पर नहीं कर पा रहे हैं, वह भी वक्त वे वक्त इबादत कर रहे हैं। ऐसे में बच्चे कैसे पीछे रह सकते हैं। ये पढ़ाई-लिखाई के साथ रोजा रख रहे हैं।
घर वालों के मना करने के बाद भी वह इबादत में पीछे नहीं रहना चाहते हैं। बताया जाता है कि इस्लाम में 12 साल के बच्चों पर रोजा फर्ज है, लेकिन शहर में इससे कम उम्र के बच्चे न केवल रोजा रख रहे हैं, बल्कि कुरान भी पढ़ रहे हैं। पांचों वक्त की नमाज अदा कर रहे हैं।
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खाली समय में भी इबादत करते हैं
फोटो-18एयूआरपी 32- मोहम्मद सैफ। स्रोत: परिजन
कस्बा इस्लाम नगर बाबरपुर निवासी मोहम्मद आबिद मंसूरी के पुत्र सात वर्षीय मोहम्मद सैफ ने बताया कि सहरी में रोजा रखने के साथ सुबह नमाज पढ़ने जाते हैं। जो समय बचता है, उसमें इबादत करते हैं। पिछले साल पूरे रोजे नहीं रख पाए थे। इस बार इबादत जरूर पूरी करेंगे।
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फोटो-18एयूआरपी 33- मोहम्मद उवेश। श्रोत-परिजन
बड़े बुजुर्गाें को देखकर रखा रोजा
गांव सोनासी निवासी मोहम्मद साजिद के पुत्र 10 वर्षीय मोहम्मद उवेश ने बताया कि घर के बड़े बुजुर्गाें को रोजा रखते हुए देखा तो उन्होंने भी रोजा रखा। रोजा रखने से अंदर से ताकत मिलती है। कुरान, नमाज के बाद स्कूल की पढ़ाई भी करते हैं। इसमें उनके घर वाले भी सहयोग करते हैं।
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फोटो-18एयूआरपी 34- शाहेनूर। स्रोत: परिजन
नमाज में बीत रहा समय, नहीं होती कोई परेशानी
कस्बा अनंतराम निवासी सिराजुद्दीन की बेटी आठ वर्षीय शाहेनूर ने बताया कि परिवार के सभी लोग रोजा रखते हैं। वह भी उनके साथ जिद करके रोजा रखती हैं। आधा समय नमाज और कुरान पढ़ने में चला जाता है। बाकी समय में मां के काम में हाथ बंटाती हैं। पहला रोजा रखा तो कोई परेशानी नहीं हुई। इसके बाद और भी रोजे रखेंगे। नमाज पढ़ने और कुरान पढ़ने में समय बीत जाता है। रोजा रखने के साथ इबादत करने में अच्छा लगता है। इससे उन्हें ताकत मिलती है। इन बच्चों के हौसले अफजाई करते हुए घर बालों ने तरह-तरह के पकवान व फल का इंतजाम किए। इन बच्चों ने साढ़े 13 घंटे का रोजा रखा और शाम 6:25 पर इफ्तार किया।
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