व्यापारी नेता राजकुमार सक्सेना
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औरैया। स्वतंत्रता दिवस पर शहर की दो सड़कों पर लगाई गईं मानक विहीन तिरंगा झालरें चार-पांच दिन के भीतर ही खराब हो गईं। जिससे लाखों रुपये बर्बाद हो गए। इससे लोगों ने पालिका प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।
आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान नगर पालिका प्रशासन की ओर से शहर के दिबियापुर रोड से खानपुर चौराहे तक और फफूंद रोड से लेकर जालौन चौराहे तक लगे स्ट्रीट लाइट के खंभों को तिरंगा झालरों से सजाने के लिए टेंडर दिया था। तब ठेकेदार के माध्यम से जैम पोर्टल से नौ लाख रुपये के बजट से जुलाई माह मेें तिरंगा झालरों की खरीद की गई थी।
अहम बात यह है कि पालिका प्रशासन ने इसकी गुणवत्ता की जांच किए बिना ही जुलाई माह में ही भुगतान भी कर दिया। 11 अगस्त से दोनों मार्गों पर स्ट्रीट लाइट पोल पर इन झालरों को लगाया गया। मजे की बात तो यह है कि नौ लाख रुपये के बजट से लगाई गईं यह तिरंगा लाइटें एक पखवारे भी नहीं चल सकीं। कई पोल की लाइटें तो लगने के तीसरे दिन ही खराब हो गईं थीं। बावजूद इसके इस ओर किसी ने भी कोई ध्यान नहीं दिया।
शहर निवासी व्यापारी नेता राजकुमार सक्सेना का कहना है कि शहर में लाखों रुपये कीमत से खरीद कर लगाई गई तिरंगा लाइटों में गुणवत्ता पर कोई ध्यान न देकर जनता की गाड़ी कमाई को पानी की तरह से बहाया गया है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। बघाकटरा वार्ड के सभासद रवि चतुर्वेदी बोले कि झालरें खरीदने के लिए पालिका प्रशासन ने बोर्ड बैठक में कोई प्रस्ताव नहीं रखा। सब कुछ अपनी मनमर्जी से किया गया, जो सरासर गलत है। इसकी जांच होनी चाहिए। जिससे गुणवत्ता विहीन झालरों का पैसा मनमानी करने वालों से वसूला जा सके।
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका रामआसरे कमल ने कहा कि मैने अगस्त माह में चार्ज लिया है। यह खरीद और भुगतान का मामला जुलाई माह का है। इसलिए इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है।
सभासद रवि चतुर्वेदी- फोटो : AURAIYA
बंद पड़ीं सफेद व केसरिया रंग की झालरें । संवाद- फोटो : AURAIYA