औरैया। कोटा बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसिक पानी ने शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी के पानी में हलचल पैदा कर दी है। प्रति घंटे तेजी से बढ़ रहे पानी ने यमुना नदी के पैमाने पर 107 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया है। तो वहीं अजीतमल क्षेत्र में सुबह तक रपटा पुल के डूबने की आशंका जताई जा रही है।
राजस्थान स्थित कोटा बैराज से दो दिन पहले छोड़े गए पानी ने चंबल के रास्ते यमुना नदी में पहुंचकर बाढ़ जैसे हालात पैदा करने शुरू कर दिए हैं। सोमवार शाम से शुरू हुई बढ़त ने मंगलवार शाम चार बजे पैमाने पर पानी की 107.32 मीटर पर आमद दर्ज करा ली है। केंद्रीय जल आयोग कर्मचारियों के मुताबिक हर घंटे 10 से 12 सेमी बढ़ रहे जलस्तर के चलते देर रात तक 110 मीटर के लगभग पानी के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार यदि यही स्थिति रही तो नदी किनारे बसे गांवों में पानी घुसने की पूरी संभावना बनती नजर आ रही है। उधर यमुना में जलस्तर के बढ़ने से शेरगढ़ घाट पूरी तरह से पानी में समा चुका है।
पानी बढ़ने से अजीतमल क्षेत्र के गौहानी कला ग्राम पंचायत में नाले के रास्ते रपटा पुल पर पानी पहुंचना शुरू हो गया है। यदि पानी बढ़ने की स्थिति यही रही तो गौहानी कला स्थित रपटा पुल डूबने की स्थिति में पहुंच जाएगा। जिससे गौहानी ग्राम पंचायत की लगभग आठ हजार की आबादी का शहर से संपर्क टूट सकता है। यमुना नदी किनारे बस गांव बड़ेरा, जाजपुर, गौहानीकल, सिकरोड़ी, गौहानी खुर्द, असेवटा, गूंज आदि गांवों के किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। लगातार तेज गति से बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए प्रशासन भी चौकन्ना है।
यमुना नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ आने पर निपटने को तैयारी पूरी कर ली गईं हैं। किसी भी समस्या से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। - अमित कुमार तिवारी, उपजिलाधिकारी
बाढ़ से निपटने के लिए हुई तैयारियां
यमुना के किनारे के पांच विद्यालयों प्रा. वि. हनुमान गढ़ी, बड़ैरा, शाला सिमार, छोटी गूंज, तथा बीझलपुर को चिह्नित किया है जिस पर गांव के लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जा सके। बाढ़ चौकियों की संख्या आठ है। जिसमें इका. अमावता, जू.हा. स्कूल बल्लापुर, प्रा.वि. ऊंचा, प्रा.वि. वड़ेरा, प्रा.वि. रहमापुर प्रा.वि. बबाइन।
-
तहसीलदार ने लोगों को दी हिदायत
अजीतमल तहसीलदार जीतेश कुमार ने बाढ़ क्षेत्र के गांव सिकरोड़ी का दौरा किया है। लोगो को जागरूक करते हुए उन्हें सावधान रहने की हिदायत दी। वहीं लेखपाल सहित अन्य कर्मचारियों को गांव में ही रात्रि विश्राम पर बाढ़ पर नजर रखने और लोगों को राहत पहुंचाने की सख्त हिदायत दी है।