संवाद न्यूज एजेंसी
दिबियापुर। अब उनका बेटा उन्हें कभी नहीं मिल पाएगा। यह कहकर मृतक एसएसई वीरेंद्र की मां रामप्यारी फफक पड़ी। रामप्यारी के अनुसार पिता की मौत के बाद वीरेंद्र उनका खूब ध्यान रखता था। घटना के 10 मिनट पहले ही मां से फोन करके उनका हाल चाल लिया था।
घटना की जानकारी होने पर दिबियापुर की रेलवे कालोनी स्थित एसएसई आवास पर पहुंची रामप्यारी के अनुसार लगभग 14 माह पहले वीरेद्र इटावा में पीडब्ल्यूआई थे। पिता विजय बहादुर की बीमारी के बीच उनका अपने गांव के नजदीक फफूंद रेलवे स्टेशन पर स्थानांतरण हो गया। इसके चलते वह काफी खुश थे। वह चाहते थे कि बीमार पिता विजय बहादुर की सेवा करें, लेकिन स्थानांतरण के एक माह बाद ही पिता का निधन हो गया था। इसके बाद मां रामप्यारी के हाल चाल लेने और खेती बाड़ी की देखरेख करने के लिए प्रत्येक सप्ताह गांव जाते थे। रामप्यारी के अनुसार रविवार की सुबह भी वीरेंद्र गांव गए थे। पूरा दिन रुकने के बाद शाम को दिबियापुर चले आए थे।
सोमवार की सुबह भी घटना से लगभग 10 मिनट पहले ही वीरेंद्र ने फोन कर उनका हाल चाल लिया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि फोन पर उनकी बेटे से बातचीत आखिरी होगी। इधर, जीआरपी चौकी भर्थना से पहुंचे दरोगा मुनेंद्र सिंह ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। मुनेंद्र सिंह ने बताया कि शव की शिनाख्त उनके रिश्तेदारों ने की है।
एसएसई ने चार वर्ष पहले खोया था बड़ा बेटा
रामप्यारी ने बताया कि वीरेंद्र के दो बेटे थे। इनमें से बड़े बेटा इंजीनियर ऋषभ बंगलौर में नौकरी कर रहा था। लगभग चार वर्ष पहले हार्ट अटैक से ऋषभ की मृत्यु हो गई थी। बड़े बेटे की मौत के बाद वीरेंद्र काफी टूट गए थे। उनका छोटा बेटा कपिल गाजियाबाद में तैयारी कर रहा है। उसके सोमवार देर शाम तक दिबियापुर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रतिदिन ट्रेन से जाते थे ड्यूटी
मां रामप्यारी ने बताया कि वीरेंद्र प्रतिदिन ट्रेन से जाते थे और खाना के लिए टिफन लेकर जाते थे। लेकिन सोमवार को लेट होने के कारण वह स्कूटी से गए थे। खाना घर से ही खाकर निकले थे, इसके चलते टिफन नहीं लेकर गए थे।
एसएसई पद पर कार्यरत वीरेंद्र कुमार ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान उनकी ट्रेन की चपेट में आने से मृत्यु हो गई। एईएन इटावा एनके सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी हादसे के कारणों की जांच करेंगे। -
अमित सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज