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औरैयाः अभिलेख मिले फिर भी अटकी है घोटाले की जांच

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औरैया। जिला समाज कल्याण विभाग में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार उत्पीड़न मद में हुए घोटाले के कई अभिलेख मिलने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। जांच के नाम पर अधिकारियों ने चार माह से अधिक का समय गुजार दिया, इसके बाद भी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नहीं भेजी। इस मामले में एफआईआर कराने के निर्देश शासन स्तर से दिए जा चुके हैं। घोटाले में जिला स्तर से चल रही लचर कार्रवाई को लेकर अब निदेशालय से तीन सदस्यीय कमेटी की गई है।
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लाखों के घोटाले में जिला समाज कल्याण अधिकारी कई अभिलेख न मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ती रहीं। तब 19 अगस्त को जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने नायब तहसीलदार पवन कुमार की मौजूदगी में विभाग की एक अलमारी का ताला खुलवा कर घोटाले से जुड़ी कई पत्रावलियां सुपुर्द करवा दीं। इसके बाद भी एक माह से अधिक का समय बीतने पर भी मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंची, जबकि शासन ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर पूरी आख्या मांगी थी।
यह था मामला
चार माह पहले बिधूना के लोहिया नगर निवासी शिवम सिंह ने जिलाधिकारी से अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार उत्पीड़न मद में 26 लाख का घोटाला किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच की गई तो वर्ष 2021-22 में 17 लाभार्थियों के खाता नंबर बदलकर नौ लाख 75 हजार, 2020-21 में नौ लाभार्थियों के नौ लाख 25 हजार व 2019-20 में 13 लाभार्थियों की सात लाख 25 हजार रुपये की धनराशि का घोटाला मिला। इसमें पटल सहायक आकाश गौतम और कंप्यूटर आपरेटर मनोज कुमार को दोषी पाए गए थे। तत्कालीन प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी आशुतोष सिंह, श्रीभगवान और आवेश कुमार की लापरवाही पाई गई थी। इसके बाद से लिपिक आकाश गौतम गायब चल रहे थे। इस वजह से कुछ दस्तावेज एक अलमारी में बंद थे। तब अधिकारी अभिलेख पूरे न मिलने पर कार्रवाई से बच रहे थे। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जांच में क्या हुआ, इसको लेकर समाज कल्याण अधिकारी से रिपोर्ट मांगी जा रही है। शासन से मामले में कार्रवाई के निर्देश है, जिस पर अमल किया जाएगा।
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अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार उत्पीड़न मद घोटाले में जिले स्तर से चल रही लचर कार्रवाई को लेकर निदेशालय से निदेशक समाज कल्याण राकेश कुमार ने निदेशालय के संदीप कुमार सिंह, नीरज मदेसिया, गजेंद्र द्विवेदी की एक टीम का गठन किया है। टीम के सदस्य औरैया समाज कल्याण कार्यालय आकर एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद शासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी, ताकि घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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