रुरुगंज (औरैया)। बिधूना तहसील क्षेत्र के कुदरकोट गांव में भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल है। यहीं से भगवान कृष्ण ने राजकुमारी रुक्मिणी का हरण किया था। जन्माष्टमी में यहां पर भक्तों की काफी भीड़ होती है। काफी समय से स्थानीय लोग कुदरकोट को पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग कर रहे है, पर जिला प्रशासन की अनदेखी से यह स्थल उपेक्षा का शिकार है।
मंदिर के पुजारी राम कुमार चौरसिया बताते हैं कि कुदरकोट में पांच हजार वर्ष पहले राजकुमारी रुक्मिणी के पिता महाराज भीष्मक ने पुरहा नदी के किनारे शिवलिंग की स्थापना कराई थी। तब प्राण प्रतिष्ठा में युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल व सहदेव ने भी भाग लिया था। फिरयह मंदिर जर्जर हो गया था, करीब पांच दशक पहले जन सहयोग से इसका पुनरोद्धार करवाया गया। मंदिर में शिव भक्तों की काफी भीड़ होती है।
द्वापर युग में यह माता गौरी मंदिर के नाम से जाना जाता था। यहां पर राजकुमारी रुक्मिणी पूजा करने आती थीं। विवाह के एक दिन पहले जब वह यहां पर पूजा करने आई थीं तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर ले गए थे। मान्यता है कि मंदिर में पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां गुरु पूर्णिमा, चैत्र व दशहरा में तीन दिन का मेला लगता हैं। बताया जाता है कि माता गौरी राजकुमारी रुक्मिणी को आशीर्वाद देने के बाद अलोप हो गईं थीं। इसके बाद इस मंदिर का नाम अलोपा देवी पड़ा है। पुजारी ने बताया कि अधिकारियों ने कुदरकोट को पर्यटक स्थल घोषित करने की भी बात कही थी, लेकिन अधिकारी आश्वासन देकर भूल गए।
समस्याओं से जूझ रहा है कुदरकोट
बिधूना तहसील क्षेत्र के कुदरकोट में द्वापर युग में बनवाए गए भयानक नाथ मंदिर व अलोपा देवी मंदिर को द्वापर युग में एक अच्छा स्थल बताया गया है। वर्तमान में मंदिर के लिए जाने वाले रास्ते पर लोगों ने जानवर बांधकर कब्जा कर रखा है। सड़कों पर बहता गंदा पानी कुदरकोट के लिए मुसीबत बना है। मंदिर जाने वाले रास्ते पर सफाई व्यस्था नहीं है। समाजसेवी शिवम बाथम ने बताया कि अधिकारी मंदिर में आते है और कायाकल्प कराने की बात भी कहते हैं, लेकिन इसके बाद भूल जाते है। कुदरकोट को पर्यटक स्थल घोषित करने पर क्षेत्र के लोगों को काफी लाभ मिलेगा।
मां अलोपा देवी की प्रतिमा। संवाद- फोटो : AURAIYA
पुजारी राम कुमार चौरसिया। संवाद- फोटो : AURAIYA