अजीतमल। अपहरण के मामले में बरामद किशोरी को पुलिस ने पांच दिन बाद परिजनों को सौंपने पहुंची तो परिजनों ने किशोरी को घर में रखने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने किशोरी को महिला पुलिस कर्मियों की देखरेख में वन स्टॉप सेंटर में रखा है।
पांच दिन तक किशोरी व उसे ले जाने वाले आरोपी को थाने में रखने के मामले में अटसू चौकी को निलंबित किए जाने के बाद विभागीय जांच बैठाई गई है। इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए हैं। कोतवाली पुलिस की भूमिका पर भी जांच की जा रही है। इधर मामला बढ़ता देख गुरुवार की रात ही कोतवाली पुलिस किशोरी के घर पहुंची थी। जहां पर पुलिस ने पिता को बेटी को सुपुर्दगी में लेने की बात कही। मगर परिवार के लोग पुलिसिया कार्रवाई से नाराज और पांच दिन तक थाने में बिना कार्रवाई के बैठाए रखने पर सुपुर्दगी लेने से इंकार कर दिया।
मामला बिगड़ता देख पुलिस भी दबे पांव रात में लौट आई। पुलिस ने किशोरी को वन स्टॉप सेंटर में रखा है। बता दें कि कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने अर्जुन शर्मा निवासी गाजियाबाद के खिलाफ सात सितंबर को 16 वर्षीय बेटी को ले जाने के मामले में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़ित किशोरी के पिता के अनुसार नौ सितंबर को कोतवाली पुलिस ने नाबालिग बेटी व आरोपी को गाजियाबाद से तलाश लिया। इसके बाद पुलिस दोनों को कोतवाली अजीतमल ले आई। मामला पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो एसपी चारू निगम ने अटसू चौकी प्रभारी अवनीश कुमार को निलंबित कर जांच बैठा दी।
कोतवाली प्रभारी ललित कुमार ने बताया कि किशोरी को वन स्टॉप सेंटर में रखा गया है। परिवार के लोगों ने सुपुर्दगी नहीं ली है। शनिवार को उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।