औरैया। पति की सेवा करना ही नारी का परम धर्म है। उनकी आज्ञा का कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए। उसके बिना कभी अकेले किसी अनजाने स्थान पर नहीं जाना चाहिए। रामलीला में सती अनुसुइया ने माता सीता को स्त्री धर्म निभाने के उपदेश दिए। इससे पहले प्रभू श्रीराम और भरत मिलन का मंचन किया गया।
शहर के मोहल्ला तिलक नगर स्थित पुराना नुमाइस मैदान में आयोजित रामलीला महोत्सव के दौरान रविवार की रात रामलीला में जयंत लीला, भरत मिलाप, चित्रकूट में अनुसुइया उपदेश, पंचवटी निवास का मंचन किया गया। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और आचार्य मनोज अवस्थी जी महाराज ने रामदरबार की आरती कर किया। ननिहाल से लौटने के बाद भरत और शत्रुघन अयोध्यावासियों के साथ श्रीराम को मनाने चित्रकूट जाते हैं। उनसे वापस चलने के लिए निवेदन करते हैं। परंतु भगवान पिता के वचन को पूर्ण करने के लिए यह अस्वीकार कर देते हैं।
भरतजी श्रीराम की खड़ाऊं लेकर वापस आते हैं और उनको सिंहासन पर रख कर स्वयं नंदीग्राम में एक कुटिया बनाकर साधु के समान अपना जीवन व्यतीत करने लगते हैं। इधर, श्रीराम 12 वर्षों तक चित्रकूट में निवास करते हैं और कई ऋषियों से मिलते हैं। श्रीराम अत्रि मुनि के आश्रम में पहुंचते हैं जहां अनुसुइया माता जानकी को पतिव्रत धर्म का उपदेश देती हैं। रामलीला कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अध्यक्ष जितेंद्र उर्फ छुन्ना मिश्रा, रामजी तिवारी, अवधेश मिश्रा, शिवदास वर्मा, राजकुमार सक्सेना, चंदू तिवारी आदि लोगों द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
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रामलीला में आज - सीता खोज, शबरी मिलन, सुग्रीव मित्रता, बाली वध।