औरैया। ऐसे बच्चे जो स्कूल आने-जाने में असमर्थ हैं, अब उन्हें घर पर ही पढ़ाया जाएगा। ताकि दिव्यांग बच्चों का भविष्य भी संवर सके। समुचित पठन-पाठन व सेहत के लिए लाखों रुपये खर्च कर उपकरण व पाठन सामग्री खरीदी गई है। स्पेशल एजुकेटर व फिजियोथेरेपिस्ट के माध्यम से पढ़ाई व सेहत दोनों का ध्यान रखा जाएगा।
जिले में 2340 दिव्यांग बच्चों की पहचान की गई है। इनमें 66 गंभीर दिव्यांगता से पीडि़त हैं। ये बच्चे विद्यालय पहुंचने में असमर्थ हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से होमबेस्ड एजुकेशन के इंतजाम किए गए हैं। इन बच्चों के लिए उपयोगी उपकरणों की खरीद की गई है। ये उपकरण उनको घर पर मुहैया कराए जाएंगे। उनको घर पर ही पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षित 13 एजुकेटर लगाए हैं। जिला समन्वयक समेकित शिक्षा कुलदीप सचान ने बताया कि एक-एक स्पेशल एजुकेटर को तीन-तीन न्याय पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक एजुकेटर का विद्यालय में पहुंचने का समय सारिणी निर्धारित है।
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प्रति बच्चे 3500 रुपये किए गए खर्च
उपकरणों पर 3500 रुपये प्रति बच्चे पर खर्च किए जाएंगे। इसमें लकड़ी व प्लास्टिक के विभिन्न मॉडल, अल्फाबेटिक हिंदी-अंग्रेजी, नंबर आकार, आकृति, म्यूजिकल उपकरण, शरीर के अंग, किचेन व डॉक्टर सेट, फल, सब्जियां, यातायात के साधन, विभिन्न प्रकार के पैग बोर्ड के अलावा पिक्टोरियल चादर्स, हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती, पहाड़ा, पशु-पक्षियों के चार्ट, सेंसरी स्टिमुलेशन किट, मल्टी सेंसरी फ्लैश बोर्ड और दैनिक जीवन से संबंधित क्रियाकलाप से जुड़े मॉडीफाइड सामग्री समेत अन्य उपयोगी उपकरण हैं।
बोले जिम्मेदार
जिले में कुल 66 गंभीर दिव्यांग बच्चे हैं, जो विद्यालय पहुंचने में असमर्थ हैं। इन बच्चों को पढ़ाई के लिए पठन-पाठन की सामग्री की खरीदारी की गई है। विशेष प्रशिक्षित एजुकेटर लगाए गए हैं। - अनिल कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी