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Auraiya News: तबादले के लिए शिक्षकों ने स्वस्थ परिजन को कागजों में दिखाया बीमार

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संवाद न्यूज एजेंसी
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औरैया।
परिषदीय विद्यालय की कक्षा चार की फुलवारी किताब में राजा हरिश्चंद्र की कहानी अक्सर शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हुए सत्यवादी होने के लिए प्रेरित करते है। यह पाठ शायद जिले के चार शिक्षकों ने पढ़ा ही नहीं और न ही सत्य की अहमियत समझते हैं। यही वजह है कि शिक्षकों ने मनमाना तबादला कराने के लिए झूठे कागजात आवेदन में लगा परिजन को बीमार दिखा दिया। लाभ पाने की चाह में झूठ का सहारा लिया। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने इनकी चालाकी पकड़ ली। तबादला रुकने के साथ ही अब इन शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय बाद शिक्षकों के एक से दूसरे जिले में तबादले के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। लंबी जद्दोजहद के बीच जिले के 183 शिक्षकों ने आवेदन किए। कार्यमुक्ति करने से पहले उनकी ओर से वेटेज (भारांक) के लिए लगाए गए कागजातों की फिर से जांच कराने का शासन स्तर से निर्णय लिया गया। क्योंकि परिजन के असाध्य रोग के लिए लगाए गए कागजातों में प्राथमिक स्तर पर कमियां पाई गई। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने जांच की।
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चार शिक्षकों ने बिना सीएमओ के सत्यापन वाले कागजात लगा दिए। आलम यह रहा कि तबादले की चाह में झूठ का सहारा लिया गया। स्वस्थ परिजनों को गंभीर बीमारी से ग्रसित दर्शाने का प्रयास किया गया। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इन शिक्षकों का तबादले के लिए जरूरी भारांक खत्म कर दिया गया। ऐसे में इन शिक्षकों को तबादले में परेशानी उठानी पड़ सकती है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि चार शिक्षकों के कागजात जांच कमेटी द्वारा फर्जी पाए गए हैं। भारांक के अभाव में अब इन शिक्षकों को जिले में ही नौकरी करनी होगी। शासन से निर्देश मिलने पर कार्रवाई भी हो सकती है।

गृह जनपद के लिए तबादले को लेकर भारांक के लिए प्राथमिक मानक
-महिला शिक्षक होना
-दिव्यांग होना
-पुरुष या महिला अकेले है और बच्चे दूर होना
-माता-पिता व अन्य परिजन का बीमार होना
-सेवाकाल लंबा होना
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