संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। पराली प्रबंधन के प्रति प्रशासन व कृषि विभाग गंभीर हो चुके हैं। सेटेलाइट से पराली जलाने मॉनीटरिंग हो रही है, यदि जिले में कहीं भी उसे जलता पाया गया तो संबंधित किसानों की मुश्किल बढ़नी तय है। उन पर निर्धारित मानकों के तहत अर्थदंड लगाया जाएगा।
पराली को जलाने से जहां खेतों में मौजूद कीट मित्र मर जाते हैं, वहीं खेत की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। इससे नुकसान किसानों का होता है। साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है। फसल उत्पादन के बाद खेतों में जुताई कराते हुए फसलों के दृष्टिगत उपयुक्त बनाने के चक्कर में किसान पराली को जला रहे हैं।
प्रशासन व कृषि विभाग की ओर से उन्हें जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है, पिछले साल की तुलना में घटनाओं में कमी आई है, मगर अभी वे पूर्ण रूप से जागरूक नहीं हो सके हैं।
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अब तक हुईं पराली जलाने की घटनाएं एक नजर में
- सदर ब्लॉक के गाजीपुर में पराली जलाने की घटना
- ब्लॉक एरवाकटरा के समाइन में पराली जलाने की घटना
- ब्लॉक सहार के असु में पराली जलाने की घटना
- ब्लॉक बिधूना में रामनगर महूं में पराली जलाने की घटना
- ब्लॉक बिधूना के बरकसी में पराली जलाने की घटना
- ब्लॉक बिधूना के रुरुखुर्द में पराली जलाने की घटना
पराली प्रबंधन के प्रति प्रशासन गंभीर है। किसानों को नियमित रूप से जागरूक किया गया है। यदि फिर भी पराली जलती हुई मिलेगी संबंधित किसानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। - प्रदीप यादव, उप कृषि निदेशक