संवाद न्यूज एजेंसी
फफूंद। थाना क्षेत्र के गांव अधासी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रीधाम वृंदावन से आए कथावाचक रामसखा महाराज ने कथा का रसपान कराया। कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। इसके लिए मनुष्य को निर्मल भाव से कथा सुनने और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।
कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारदजी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारद जी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र हैं, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य है।
यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे, लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए। इसके बाद देवर्षि नारदजी ने चारों वेद, छहों शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया, लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान, वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा। उन्होंने कहा कि गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है। दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दें। वह मनुष्य महात्मा होता है।
भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं। वह सबके हृदय में मौजूद हैं। अगर जरूरत है तो सिर्फ महसूस करने की। कथा पंडाल की व्यवस्थाओं को कमलेश कुमार मिश्रा, परीक्षित अनिता मिश्रा व अजय मिश्रा, गोल्डी मिश्रा, गोलू मिश्रा, रेनू मिश्रा की ओर से कराया।