औरैया। वर्तमान समय में गेहूं की कटाई चल रही है। बहुतायत में ग्रामीण क्षेत्र का मतदाता काम में व्यस्त हैं। गर्मी के सितम के बीच ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहर कस्बों में दोपहर का सन्नाटा रहता है। चुनावी जनसंपर्क भी शाम व रात को चल रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर मतदाता चुपचाप हैं।
मतदाताओं की ओर से अपने पत्ते न खोलने की वजह से चुनावी विश्लेषक भी माहौल भांपने में महज तर्क-वितर्क तक ही सीमित हैं। वोटर लोकतंत्र में मर्यादाओं के साथ मतदान करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में मतदान से पहले के छह दिन प्रत्याशियों के भविष्य का निर्णय करने में काफी कुछ निर्धारक बनेंगे।
राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों की जनसभाएं चल रही हैं। जनसंपर्क भी परवान चढ़ रहा है। औरैया जिले में इटावा व कन्नौज लोकसभा सीट के लिए मतदाताओं का वोट काफी कुछ निर्धारक बनेगा। पिछले सालों के चुनावों में चाहे इटावा सीट रही हो या कन्नौज औरैया के मतदाताओं ने काफी कुछ समीकरण बनाए और बिगाड़े हैं।
यहां पर जातीय कार्ड से लेकर तमाम फेक्टर इस चुनाव का हिस्सा बने हैं। तमाम घटनाओं के चलते मतदाता अपना रुख स्पष्ट करने से किनारा कर रहे हैं। पूछताछ में मतदाता महज पहेली में जवाब देकर सामने वाले को गुत्थी सुलझाने पर मजबूर कर रहे हैं। हालांकि चुनावी जानकारों की मानें तो वोटरों का एक मुश्त इधर से उधर होना भी इस चुनाव में संभव है।
प्रत्याशियों से लेकर पार्टी का पक्ष काफी कुछ दांव पर होगा। जिले में चौथे चरण में 13 मई को मतदान होने हैं। ऐसे में रोड शो व जनसभाएं अब चंद रोज की बची हैं। जनता में एक राय भी देखने को मिली है कि मतदाता पहले से ही मत का रुख अपना चुके हैं। मुद्दों व विचारधारा पर मतदान करते हुए अडिग नजर आएंगे।