औरैया। सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव भीखापुर में शिक्षामित्र की हत्या कर भाग रहे आरोपी को पकड़ने के बाद उसी की रायफल की बट व पत्थर से कूंच कर हत्या की गई थी। पुलिस हत्थे चढ़े शिक्षामित्र के बेटे व भतीजे ने यह बात स्वीकार की। पुलिस ने घटना में तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया है। बेटे व भतीजे ने बताया कि उनके सामने हत्या हुई और कुछ नहीं कर पाए, इसी पर उनका खून खौला और हत्यारोपी को मौत के घाट उतार दिया।
भीखापुर में सोमवार रात तेरहवीं संस्कार में पुरानी रंजिश व तंज कसे जाने से आहत ब्रह्मनगर औरैया निवासी अरुण उर्फ बबलू सेंगर ने शिक्षा मित्र रामवीर राजावत की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद भागते समय ग्रामीणों व शिक्षामित्र के परिजनों ने उसके पकड़ लिया और मारपीट कर उसकी हत्या कर दी थी। अरुण के चचेरे भाई नरेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें पुलिस ने नामजद आरोपियों में भीखापुर निवासी रामवीर के भतीजे शिवम, सुरेंद्र उर्फ गब्बर व पुत्र नारायण को गांव से ही गिरफ्तार कर लिया।
एसपी चारू निगम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने गोली मारकर भाग रहे अरुण उर्फ बबलू को पकड़ने के बाद उसी के रायफल की बट से पीटकर हत्या कर दी। साथ ही पहचान छिपाने के लिए बबलू के चेहरे को पत्थर से कूंच दिया। बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने अरुण उर्फ बबलू की लाइसेंसी रायफल की बट का टूटा हिस्सा बरामद किया है। तीनों हत्यारोपियों को जेल भेज दिया गया है। वहीं पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी को दबिशें दे रही है। जल्द ही अन्य हत्यारोपी भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
अरुण को साथी बता करते रहे गुमराह
रामवीर की हत्या के समय वहा उसका पुत्र नारायण, भतीजा शिवम व अन्य परिजन मौजूद थे। भाग रहे आरोपी को हरपाल सिंह के मकान के पास लोगों ने घेरकर पकड़ा और पीट-पीट कर मार डाला था। पुलिस के पहुंचने के बाद परिजन व ग्रामीण उसकी शिनाख्त को लेकर चुप्पी साध गए जैसे घटना से अनजान हो। पुलिस अधिकारियों के सामने रामवीर के परिजन व ग्रामीण अरुण के शव को उसके साथ आया उसका साथी बताते रहे। पुलिस ने साथी का पता लगाने के लिए माथा पच्ची की, इधर देर रात चचेरे भाई नरेंद्र ने हुलिए से अरुण होने की आशंका जताई। सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंची बहन शशि ने जब शिनाख्त की तब स्थिति साफ हुई थी।
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20 साल तक पिता ने बचाया, हम पिता को नहीं बचा पाए
अरुण की हत्या में गिरफ्तार किए गए रामवीर के बेटे ने पुलिस के सामने कहा कि उसे सिर्फ इस बात का पछतावा है कि उसके सामने पिता की हत्या हो गई और वह उन्हें बचा नहीं सका। कहा कि पिता ने 20 साल परवरिश कर उसे बचाए रखा, मगर उन्हें बचाने में वह नाकामयाब हो गया। इधर चचेरे भाई सुरेंद्र को इस बात का पछतावा था कि घर वालों ने जल्दबादी कर दी। यदि अरुण को न मारा होता तो आज वह नहीं आरुण जेल में होता।