अयाना (औरैया)। दस्यु सम्राट लालाराम गिरोह के मुख्य सदस्य छेदा उर्फ छिद्दा (69) की सोमवार शाम सांस की बीमारी के चलते सैफई में मौत हो गई। पुलिस ने 26 जून को 50 हजार के इनामी छेदा को गिरफ्तार कर इटावा जेल भेजा था।
अयाना के भाषौन गांव निवासी छेदा उर्फ छिद्दा बीहड़ क्षेत्र में 90 के दशक के कुख्यात दस्यु लालाराम के गिरोह का मुख्य सदस्य था। उस पर औरैया, जालौन, कानपुर देहात व मध्यप्रदेश में 20 से अधिक लूट, अपहरण, फिरौती के मामले दर्ज थे। पुलिस से बचने के लिए वह चित्रकूट में सन्यासी के भेष में आराधना आश्रम जानकीकुंड में रहने लगा था। सांस की बीमारी के चलते छेदा साधु-संतों के साथ 25 जून के अपने गांव भाषौन पहुंचा था।
तभी अयाना थानाध्यक्ष जितेंद्र यादव ने मुखबिर की सूचना पर छेदा को गिरफ्तार कर 26 जून को जेल भेज दिया था। पुलिस के मुताबिक, वह गिरफ्तारी के डेढ़ साल पहले से बीमार चल रहा था। इटावा जेल में छेदा की तबियत बिगड़ जाने पर जेल प्रशासन ने उसे सैफई में भती कराया था। जहां सोमवार शाम को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मंगलवार शाम को शव गांव पहुंचने पर परिजनों में कोहराम मच गया।
छेदा पर था 50 हजार का इनाम
अयाना के स्वरूप नगर निवासी सब्दल सिंह पुत्र जयसिंह को छेदा ने 23 सिंतबर 1997 को क्षेत्र से अगवा कर एक लाख 25 हजार फिरौती लेकर छोड़ा था। वर्ष 1998 में गैंग के साथ जसवंतपुर निवासी चार युवकों को अगवा किया था। जिसमें तीन को फिरौती लेकर छोड़ा था, जबकि चौथे युवक को पुलिस ने मुठभेड़ में छुड़ाया था। 1998 में पुलिस ने छेदा पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था।
इधर पुलिस के दस्यु मुक्त चंबल करने के लिए दस्युओं का सफाया करने में जुटी थी। तभी छेदा चित्रकुट भाग गया था। चंबल की घाटियों में अपनी तूती बुलवाने बाला छेदा अपनी बीमारी के चलते लाचार और बेबस होकर घर आ गया था। घर में बड़ी बहू संगीता, छोटी बहू अंजू, नाती गोलू, भतीजे शशिवेंद्र व गजेंद्र को आस थी कि बीमारी व उम्र को देखते हुए न्यायालय छेदा को जेल से रिहा कर देगा।