औरैया। ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसों के बाद भी लोग अपनी जान की फिक्र नहीं कर रहे हैं और धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल सवारियां ढोने के लिए कर रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए पुलिस का अभियान भी नाकाफी साबित हो रहा है। जबकि ट्रैक्टर पर सवारियां ढोने पर 10 हजार का जुर्माने का प्राविधान भी किया गया है।
लखनऊ, बाराबंकी और कानपुर की बड़ी घटना के बाद भी कोई सबक लेने के लिए तैयार नहीं है। यातायात नियमों को दरकिनार कर इनदिनों ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भर-भर लोग ढोए जा रहे हैं। ऐसे में जहां इन पर सफर करने वाले लोगों की जिंदगानी खतरे में है वहीं इसके जिम्मेदार जानबूझ कर इससे अंजान बने हुए हैं।
गुरुवार को नियमों की अनदेखी का उदाहरण एक बार फिर से सामने आया। इटावा के महेवा से अंत्येष्टि के लिए 15 लोगों को लेकर आ रहा ट्रैक्टर, ट्राली समेत सिकरोड़ी घाट से पहले भूरेपुर के पास बेकाबू होकर पलट गया। हादसे में 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस हादसे ने परिवहन और पुलिस की निगरानी की पोल खोल दी है।
एआरटीओ प्रवर्तन रेहाना बानों ने बताया कि ट्रैक्टर संचालकों को पहले जागरूक किया जा चुका है कि वह सिर्फ ट्रैक्टर व ट्राली का इस्तेमाल कामर्शियल कार्य व किसानी के लिए इस्तेमाल करें। लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।