दिबियापुर।
रेलवे स्टेशन फफूंद की आवासीय काॅलोनी में पिछले काफी समय में बंद आवासों का निर्माण आखिरकार फिर से शुरू हो गया। इसके बाद स्थानीय रेलवे कर्मियों को जर्जर आवासों के स्थान पर नए आवास मिलने की उम्मीद जगी है। अमर उजाला ने इस समस्या को 18 सितंबर के अंक में प्रकाशित किया था। अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संज्ञान में लिया था।
लखनऊ में जर्जर घोषित आवास में रह रहे एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद अमर उजाला ने फफूंद रेलवे स्टेशन की आवासीय काॅलोनी की पड़ताल की। यहां काफी आवास जर्जर हालत में मिले। कई घरों की छतों पर घास और पौधे उगे दिखाई दिए। छत पर घास और पौधों के कारण जलजमाव से हादसे का डर रहता है। यहां लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व जर्जर घोषित आवासों को तोड़कर नए आवास बनाए जा रहे हैं। मगर काफी समय से इन आवासों का निर्माण बंद पड़ा था।
अधिकारियों के निर्देश के बाद आवासों का निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया। स्थानीय रेल कर्मियों ने उम्मीद जताई कि नए आवास बन जाने के बाद उन्हें जर्जर एवं जीर्ण शीर्ण आवासों से निजात मिल जाएगी।