एरवाकटरा। इस समय प्याज की रोपाई के लिए मौसम अनुकूल है। आलू की खोदाई के बाद खाली हुए खेतों में कम लागत में प्याज की फसल से अच्छी पैदावार ली जा सकती है। किसानों को प्याज की फसल को रोगों से बचाने के लिए पौध को अच्छी किस्म के फफूंदी नाशक से उपचारित करने के बाद रोपाई करनी चाहिए। जिससे रोग लगने की संभावनाएं नहीं रहती है।
सहायक विकास अधिकारी कृषि अतुल त्रिपाठी ने बताया कि प्याज तापमान के प्रति अति संवेदनशील फसल है। इसलिए किसान नर्सरी में तैयार खड़ी पौध की रोपाई कर लें। प्याज की फसल लगाने से पहले खेत की चार से पांच बार अच्छे से जुताई कर लें। जिससे खेत की मिट्टी भुरभुरी हो सकें।
पौध की रोपाई से पहले करीब 70 से 75 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद का प्रयोग करना अच्छा रहता है। प्याज की फसल के प्रारंभिक विकास के लिए 10 से 15 डिग्री सेल्सियस और कंदों के विकास के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है। रोपाई के तुरंत बाद खेत की हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पौध की रोपाई के 30 और 60 दिन बाद करीब 40 से 45 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से प्रत्येक निराई गुड़ाई पर दें। रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर फसल पर दवाइयों का छिड़काव करें।