दिबियापुर (औरैया)। तीन वर्षों की मशक्कत के बाद कई दशकों से लंबित पड़ी प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली लगभग तीन हजार करोड़ की पचनद बैराज परियोजना धरातल पर उतरने को तैयार है। पचनद बैराज की बुंदेलखंड का सूखा समाप्त करने की दिशा में अहम भूमिका होगी। बैराज के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) एवं प्रदेश सरकार के बीच समझौता हो गया। अब सीडब्ल्यूसी की टीम डीपीआर तैयार करने के लिए जुटी है। शनिवार शाम तक सीडब्ल्यूसी की टीम ने पचनद क्षेत्र का सर्वे कर काफी जानकारियां जुटाईं।
औरैया, जालौन एवं कानपुर देहात जनपदों में असिंचित रहने वाली भूमि को संजीवनी देने के लिए कई दशकों से पांच नदियों के संगम स्थल पर पचनद बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। वर्ष 2019 में इसके लिए सर्वे शुरू हुआ। कई चरणों में हुए सर्वे एवं आईआईटी से डीपीआर तैयार कराने के बाद पिछले वर्ष 27 सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रमुख सचिव सिंचाई, प्रमुख अभियंता सिंचाई, प्रमुख अभियंता परियोजना ने बैराज की तैयार डीपीआर का प्रजेंटेशन किया था।
पचनद बैराज की 3201.70 करोड़ रुपये की डीपीआर सीडब्ल्यूसी के पास निरीक्षण के लिए भेज दी गई थी। अक्तूबर 2021 में केंद्रीय जल आयोग की टीम ने सिंचाई विभाग की टीम के साथ संयुक्त रूप से तकनीकी स्थलीय निरीक्षण किया था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 29 अगस्त को केंद्रीय जल आयोग एवं प्रदेश सरकार के बीच एमओयू (समझौता) हो गया है। अब सीडब्ल्यूसी की टीम जल्द से जल्द बैराज की डीपीआर तैयार करने के लिए जुटी है।
आठ सितंबर को सीडब्ल्यूसी की टीम में शामिल सुपरिटेंडेंट इंजीनियर अजय कुमार, अधिशासी अभियंता मयंक, असिस्टेंट डायरेक्टर मनपाल सिंह व विजय पंत, जूनियर इंजीनियर प्रेमचंद्र ने सिंचाई विभाग औरैया के अधिशासी अभियंता पीएस पटेल, सहायक अभियंता अंकित कुमार सिंह, अवर अभियंता मनीष कुमार व उमेश कुमार के साथ पचनद बैराज के लिए नदियों का स्थलीय निरीक्षण किया।
अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड औरैया पीएस पटेल ने कहा कि 29 अगस्त को केंद्रीय जल आयोग और प्रदेश सरकार के बीच पचनद बैराज को लेकर समझौता (एमओयू) हो चुका है। सीडब्ल्यूसी के अधिकारियों ने स्थलीय सर्वे भी कर लिया है। अब सीडब्ल्यूसी जल्द ही डीपीआर तैयार कर रही है।
पचनद बैराज सड़रापुर में बनना प्रस्तावित
पचनद बैराज अजीतमल के समीप सड़रापुर में बनना प्रस्तावित है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सीडब्ल्यूसी बैराज का निर्माण किसी अन्य स्थान पर बनाए जाने की संभावनाओं को भी तलाश रहा था। इसके लिए टीम ने नौ एवं 10 सितंबर को पूरे दिन स्टीमर और नाव के माध्यम से नदी में घूमकर माथापच्ची की। हालांकि सर्वे के बाद निष्कर्ष आया कि अन्य किसी स्थान पर बैराज निर्माण की संभावनाएं नहीं हैं। तय हुआ कि सड़रापुर में ही बैराज निर्माण होगा। इसके लिए टीम ने जीपीएस उपकरणों के माध्यम से नदियों में बाढ़ के समय की स्थितियों का भी आकलन किया।
प्रदेश सरकार ने किया था 102 करोड़ के बजट का प्रावधान
देश में पांच नदियों यमुना, चंबल, सिंधु, क्वारी, पहुज के इकलौते पवित्र संगम पर प्रस्तावित पचनद बैराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। प्रदेश सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में पचनद बैराज के लिए 102 करोड़ 74 लाख 16 हजार रुपये के बजट का प्रावधान भी किया था। हालांकि तकनीकी कारणों से पचनद बैराज परियोजना पिछले वित्तीय वर्ष में धरातल पर नहीं उतर सकी थी।
यहां बता दें कि पचनद बैराज बनने से औरैया, कानपुर देहात एवं जालौन में 64950 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का अपग्रेडेशन होगा। औरैया जिले की 10,501 हेक्टेयर, कानपुर देहात की 39,718 हेक्टेयर, जालौन की 14,731 हेक्टेयर असिंचित भूमि को लाभ मिलेगा। लगभग एक लाख किसान लाभान्वित होंगे। जालौन जनपद में जगम्मनपुर एवं जनपद औरैया के अजीतमल के बीच बैराज पुल के निर्माण से सीधा परिवहन मिलेगा। मत्स्य पालन में वृद्धि होगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बुनियादी ढांचे का विकास एवं सामाजिक आर्थिक कारकों में वृद्धि होगी। यहां बता दें कि बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखा समाप्त करने के लिए प्रस्तावित पचनद बैराज के लिए 13 फरवरी 2016 को तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने हवाई सर्वे किया था।
पांच नदियों के इसी संगम स्थल पर बनेगा पचनद बैराज। संवाद- फोटो : AURAIYA
पचनद बैराज का प्रस्तावित मानचित्र । संवाद- फोटो : AURAIYA