औरैया। जिले में ककोर मुख्यालय समीप कंचौसी रोड पर वर्ष 2012 में प्लास्टिक सिटी के निर्माण का खाका बना। जमीन खरीद से लेकर उद्योग स्थापन के लिए स्थानों का आंवटन हुआ, लेकिन एक दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी एक भी औद्योगिक इकाई धरातल पर नहीं लग सकी हैं। कहीं न कहीं यह बड़ी नाकामी की बानगी दे रहा है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में जहां एक ओर 112 उद्योगों के लगने का रास्ता साफ हो रहा है। वहीं प्लास्टिक सिटी इस सब के बीच निराशा व हताशा का सबब बनी है।
वर्ष 2012 में दिबियापुर के पांच गांवों की 314 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। 285 एकड़ के 286 भूखंडों में प्लास्टिक ( खिलौना, कुर्सी, प्लास्टिक पाइप आदि ) से जुड़े उद्योगों की स्थापना होनी थी। जबकि 89 एकड़ के 622 भूखंडों में आवासीय भवन बनना प्रस्तावित है। उद्योग लगाने के लिए कई छोटे बड़े उद्योगपतियों ने आवेदन किए। कई उद्योगपतियों ने भूखंड आवंटन के पश्चात उन पर कब्जा भी ले लिया। 163 स्थानों का आवंटन पिछले दिनों पूरा कर लिया गया है।
प्लास्टिक सिटी परिसर में कई जगह बिजली के तार लापता है। यहां तक कि सड़क जर्जर हैं। हालांकि इस सब के बीच एक स्क्रैब कंपनी की ओर से बिल्डिंग तैयार करने का काम शुरू कराया गया है। जबकि पूरी प्लास्टिक सिटी वीरान पड़ी है। इस पर ध्यान टिकाया जाता तो एक मुश्त कई उद्योग लगते। खाली हाथों को काम भी मिलता। हालांकि इन दिनों काफी हद तक यूपीसीडा की ओर से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। दावा यह किया जाता है कि 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है, लेकिन इस सब के बावजूद उद्यम धरातल पर नहीं लगाए जा रहे।
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क्यों बोले स्थान आवंटन पाने वाले उद्यमी
फोटो18एयूआरपी 04- गौरव दुबे। संवाद
प्रोजेक्ट लगाने में सड़क, बिजली व पेयजल बनी समस्या
नगर में विकास कुंज निवासी युवा व्यवसायी गौरव दुबे ने बताया कि उन्होंने फर्नीचर बनाने का प्रोजेक्ट सबमिट किया है। ढाई करोड़ रुपये की लागत से प्रोजेक्ट लगाना प्रस्तावित है। अभी तक सड़क, बिजली और पेयजल की आदि समस्या सामने आ रही थीं। अधिकारियों के प्रयासों से धीरे धीरे व्यवस्थाओं में सुधार आ रहा है। जैसे ही सभी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगीं। उद्योग लगाया जाएगा।
फोटो18एयूआरपी 05- अवनीश विश्नोई। संवाद
कागजी प्रक्रिया अधिक होने से आ रही समस्या
दिबियापुर में औरैया रोड पर फर्नीचर का व्यवसाय करने वाले प्लास्टिक सिटी में बुडेन एंड आयरन फर्नीचर का प्रस्ताव दिया है। एक करोड़ रुपये से प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। समय अधिक हो जाने के कारण बैनामा की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। कागजात प्रक्रिया अधिक होने के कारण समस्या आ रही है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होती है। वह अपना संयंत्र लगा लेंगे।
बोले जिम्मेदार
यूपीसीडा व लोक निर्माण विभाग की ओर से संयुक्त रूप से खामियों को दूर कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। खास तौर पर सड़क को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से लगातार इसे लेकर गंभीरता से सुध ली जा रही है। -अनुराग अग्रहरि, उद्यमी मित्र