औरैया / दिबियापुर। औरैया की हजारों करोड़ की कई परियोजनाएं बजट के इंतजार में लंबित पड़ीं हैं। कई परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए शासनादेश एवं बजट जारी होना शेष रह गया है। सोमवार को घोषित बजट में इनमें से किसी परियोजना के लिए कोई जिक्र न होने से जिले के लोगों को मायूसी हाथ लगी है। हालांकि पीडब्ल्यूडी एवं सिंचाईं विभाग के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि अभी तक बजट की विस्तृत बुकलेट नहीं आई है। विस्तृत बुकलेट आने के बाद स्थिति साफ हो पाएगी।
1 -
पिछले बजट में पचनद परियोजना को मिला था पचास करोड़ का बजट
कई दशकों से अजीतमल क्षेत्र में यमुना नदी पर लगभग पांच हजार करोड़ रुपए की पचनद बैराज परियोजना प्रस्तावित है। इस परियोजना से जहां औरैया जिले में बाढ़ पर काबू होगा। वहीं इससे बुंदेलखंड क्षेत्र के एक लाख किसान लाभान्वित होंगे। केंद्रीय जल आयोग द्वारा बनाई जा रही परियोजना की डीपीआर अंतिम चरण में पहुंच गई है। पिछले वित्तीय वर्ष में इस परियोजना के लिए प्रदेश सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन परियोजना धरातल पर न उतर पाने के कारण बजट का प्रयोग नहीं हो पाया। सिंचाईं विभाग के अधिशासी अभियंता पीएस पटेल के अनुसार विस्तृत बुकलेट मिलने पर ही पचनद बैराज के लिए बजट के प्रावधान पर जानकारी हो सकेगी।
2-
औरैया में शेरगढ़ घाट से बेला के बीच सड़क फोरलेन होने की लगभग एक हजार करोड़ की परियोजना काफी समय से लंबित पड़ी है। इस परियोजना के लिए दो अलग-अलग चरणों में प्रस्ताव भेजा गया है। पहले चरण में औरैया से ककोर मुख्यालय तक सड़क को फोरलेन किए जाने का लगभग 238 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। यह केबिनेट की स्वीकृति के इंतजार में है। इसके साथ ही चिचौली में सेंगुर नदी पर बनने वाले पुल के लिए वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। जबकि ककोर मुख्यालय से बेला तक सड़क को फोरलेन किए जाने के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है।
इसमें दिबियापुर में रेलवे क्रासिंग पर बने पुराने पुल के साथ बनने वाला पुल, नहर पुल समेत अन्य पुल भी बनने प्रस्तावित हैं। इन दोनों परियोजनाओं के स्वीकृत होने से जिले में विकास की उम्मीदें तेजी के बढ़ेगी। इसके साथ ही दिबियापुर में बाईपास निर्माण की लगभग 541 करोड़ की परियोजना भी प्रस्तावित है। पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार यादव का कहना है कि अभी तक सड़क फोरलेन किए जाने के लिए स्वीकृति के संबंध में कोई जानकारी उनके पास नहीं आई है। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
3- दिबियापुर से याकूबपुर तक 22.7 किलोमीटर लंबे मार्ग को तीन लेन एवं दिबियापुर के बाबरपुर तक 25 किलोमीटर लंबे टू लेन मार्ग को फोरलेन किए जाने का इस्टीमेट तैयार करके शासन में भेजा जा चुका है। इन दोनों मार्गों के निर्माण में लगभग तीन सौ करोड़ रूपए की लागत आने का अनुमान है। इस मार्ग के निर्माण से सहायल क्षेत्र के सैकड़ों गांव जिला मुख्यालय से सीधे चौड़े सड़क मार्ग से जुड़ सकेंगे।
4
औरैया में प्रदेश के पहले औद्योगिक पार्क की स्थापना का प्रोजेक्ट काफी समय से लंबित पड़ा है। वर्ष 2020 में यूएम पावर की तरफ से 160.37 एकड़ जमीन पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए प्रस्ताव दिया गया था। पार्क में खाद्य प्रसंस्करण, धातु आधारित लेदर, रासायनिक, कांच, प्लास्टिक, ऑटो मोबाइल व लॉजिस्टिक सेक्टर की इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था।
380 एकड़ में फैले इस पार्क में करीब 160 औद्योगिक इकाइयों को जगह मिलनी थी। बता दें कि यूएम पावर ने पहले दिबियापुर के पास थर्मल प्लांट की स्थापना का प्रयास किया था, परंतु कोयले की नियमित आपूर्ति में कठिनाइयों से यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सका था। इन दोनों प्रोजेक्टों के शुरू होने से जिले के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता।