मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ रहा है इंजेक्शन
वहीं एआरवी इंजेक्शन की दो वॉयल (एक शीशी) से नौ लोगों को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। प्रतिदिन लगभग एक सैकड़ा कुत्ता व बंदरों के हमले से घायल मरीजों के अस्पताल आने से केवल एक ही अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 10 वॉयल की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में वैक्सीन का टोटा होने से अब मरीजों को बाहर से महंगे दामों में खरीदकर इंजेक्शन लगवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बंदरो के हमले से बनी है दहशत
शहर में कई जगहों पर बंदरों का आतंक है। इनमें से सबसे ज्यादा खतरा शहर के 50 शैया अस्पताल, नगर पालिका व ब्लॉक में बना हुआ है। यहां पर लोगों के पहुंचते ही बंदर हमला कर देते हैं। दो दिन पहले अस्पताल में बंदरों ने खूब उत्पात मचाया था। बेड फाड़ डाले और तोड़फोड़ कर गंदगी फैलाई। इनके लगातार उत्पात मचाने को लेकर मरीज परेशान है।
जिले में शायद ही किसी अस्पताल में एआरवी के इंजेक्शन हों। फिलहाल 50 शैया युक्त जिला अस्पताल में 18 मार्च से कुत्ता व बंदर काटने पर लगने वाला एआरवी इंजेक्शन नहीं है। प्रतिदिन लगभग एक सैकड़ा मरीज इंजेक्शन लगवाने आता है। अब इंजेक्शन न होने से उन्हें लौटना पड़ रहा है। -सतपाल कटियार, चीफ फार्मासिस्ट, 50 शैया युक्त जिला अस्पताल, औरैया