परिक्रमा पथ बनाते राज मिस्त्री और मजदूर। संवाद
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दिबियापुर । गहेसर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ महामाई मंदिर में परिक्रमा पथ बनना शुरू हो गया है। बैटल आफ हरचंदपुर के शहीद क्रांतिकारियों की याद में बने शहीद स्मारक का लोकार्पण करते समय डीएम ने परिक्रमा मार्ग बनाए जाने का आश्वासन दिया था।
गहेसर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ महामाई मंदिर की मान्यता औरैया जिले के साथ साथ आसपास के कई जिलों में भी है। मंदिर के आसपास ऊबड़ खाबड़ रास्ता होने के कारण आस्थावान मंदिर की परिक्रमा नहीं कर पाते थे। 15 अगस्त को जिलाधिकारी पीसी श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बैटल आफ हरचंदपुर में शहीद हुए क्रांतिकारियों की याद में शहीद स्मारक का लोकार्पण किया था। तब उन्होंने परिक्रमा पथ बनवाकर मंदिर का सुंदरीकरण कराने का आश्वासन दिया था। अब मंदिर के आसपास तकरीबन 160 मीटर लंबा परिक्रमा पथ बनना शुरू हो गया है।
यहां बता दें कि गहेसर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ महामाई मंदिर में देवी महामाई, खड़ी मुद्रा में ज्वाला देवी, गमा देवी के साथ नौ देवियों की मूर्तियां हैं। मंदिर की महिमा आल्हा खंड काव्य में भी मिलती है। किंवदंती है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व सहार स्टेट के राजा सदन सिंह ने स्वप्न देखा था कि गहेसर गांव के पास झाड़ियों में माता महामाई हैं। झाड़ियों की सफाई कराने के बाद निकली महामाई माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराकर मंदिर निर्माण कराया था। प्रसिद्ध महामाई दरबार में आल्हा ऊदल भी आया करते थे।
आल्हा खंड काव्य में माता महामाई मंदिर की महिमा का बखान है। यहां प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को भक्तों की भीड़ लगती है। प्रत्येक शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में झंडे जवारे चढ़ाने वाले भक्तों की कतारें लगतीं हैं। परिक्रमा पथ बन जाने के बाद अब आने वाली शारदीय नवरात्र में आस्थावानों को काफी राहत मिलेगी। शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से शुरू हो रही हैं।