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Auraiya News: पैकिंग प्लांट में दूसरे दिन आग लगने कारण का नहीं लगा

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औंग। एमपी-एमएलए फ्लोर मिल गोधरौली में शनिवार को आग लगी थी। दूसरे दिन रविवार को आग लगने के कारणों का पता नहीं लग सका है। प्रबंधन तंत्र नुकसान का आकलन करने में जुटा है। प्लांट में आग बुझाने की कोशिश में दमकल गाड़ियों की ओर से डाले गए पानी को मजदूर निकालने में जुटे रहे। प्लांट की दीवारें चारों ओर कालिख से पुती नजर आईं। मशीनें जलकर बर्बाद हो चुकी हैं।
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दमकल टीम ने शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका को खारिज किया है। प्लांट के बाहर तमाम फटी बोरियों का ढेर लगा है। शनिवार सुबह मजदूरों ने फटी बोरियों को सुलगते देखा। कयास लगाए जा रहे कि किसी ने सुलगती बीड़ी फेंकी होगी। बोरियों के सुलगने के समय मिल कर्मियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। चर्चा है कि बीमा के लिए भी अक्सर ऐसी दुर्घटनाएं की जा सकती हैं।
ऑटोमेटिक पैकिंग मशीन पर मिल से मैदा व अन्य प्रोडक्ट्स आते हैं। ट्रकों में सीधे लोडिंग होती है। ऐसे में स्टाॅक नहीं था, अन्यथा आग फैलने पर और भी बड़ा हादसा हो सकता था। मिल के आसपास फैक्टरियां व पेट्रोल पंप है। मालिक विवेक राठी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
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संगठन और निदेशकों ने फायर स्टेशन की मांग की

फैक्टरियों में आग की घटनाओं पर त्वरित रूप से रोक लगाने के लिए औद्योगिक संगठन व पेट्रोल पंप संचालक ने औद्योगिक क्षेत्र के बीच हाईवे पर फायर स्टेशन बनाने की मांग की है। उनके मुताबिक हाईवे पर दुर्घटनाओं में अक्सर दमकल की गाड़ी आते-आते वाहन जलकर राख हो जाते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में फायर स्टेशन में गाड़ी होने से नुकसान को रोका जा सकता है। गोधरौली, रामपुर से छिवली तक 80 फैक्टरियां हैं, जिनमें भट्ठी, बॉयलर, लकड़ी, धान की भूसी का प्रयोग होता है। खतरे के बावजूद फैक्टरियों में आग बुझाने के संसाधन नहीं हैं।


फतेहपुर पेट्रोलियम संगठन के अध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला ने औद्योगिक क्षेत्र में फायर स्टेशन बनाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी से मिलकर फायर स्टेशन के की मांग की जाएगी।

भारतीय उद्योग संगठन के जनरल सेक्रेटरी अब्दुल खालिक ने बताया 20 साल से फायर स्टेशन की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र के उद्योगों में आग लगने के हादसे के बाद फतेहपुर और बिंदकी से दमकल गाड़ी आने में देर हो जाती है। औद्योगिक क्षेत्र में फायर स्टेशन होना आवश्यक है।
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