औरैया। जिले में 20 फीसदी किसानों ने विभिन्न कारणों से गेहूं की बुवाई नहीं की है। ऐसे में जो किसान 15 दिसंबर के बाद गेहूं की बुवाई की है वह 20 फीसदी बीज की मात्रा बढ़ाएं। 15 फीसदी उर्वरक की मात्रा कम कर दें। वहीं देर से बोए गए गेहूं का किसान 15-20 दिनों बाद सिंचाई अवश्य कर दें। कुछ किसान ऐसे भी हैं जो गेहूं की सिंचाई कर रहे हैं। उनको सिंचाई के पांच दिन बाद यूरिया का छिड़काव करना चाहिए।
15 दिसंबर के बाद बोए जाने वाले गेहूं में हार्मोन का प्रयोग करने से फसल को लाभ मिलेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने किसानों को अति विलंबित प्रजाति के गेहूं उन्नत हलना, गोल्डेन हलना, डीबीडब्लू 14, एचयू डब्लू 234, एचडी 2346, पीबीडब्लू 373, आरआर 21 और एनडीडब्लू 1014 आदि का बीज चयन करने और पिछैती गेहूं की जल्दी-जल्दी सिंचाई करने की सलाह दी है। कहा कि प्रथम सिंचाई बुवाई के 15-20 दिनों में अवश्य कर दें। इससे फसल की वृद्धि एवं विकास तेजी से होगा। पौध वृद्धि हार्मोंस प्लानोफिक्स या साइकोसेल की दो प्रतिशत यूरिया एवं 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव करने से उत्पादन में वृद्धि होगी।