शहर की एक दुकान पर टंगी दस रुपये के नोटों की माला।
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नोटबंदी ने सहालग में नोटमाला की कीमत बढ़ा दी है। आरबीआई के नियमों की अवहेलना कर चल रहे इस कारोबार में गिरावट आई है, लेकिन मुनाफा बढ़ा है।
एक हजार व पांच सौ के नोटों के चलन से बाहर होने पर पूरी अर्थव्यवस्था हिल गई है। इसके बाद भी शादी विवाह के मौके पर पहनाई जाने वाली नोटों की माला का चलन बरकरार है। हालांकि इनकी डिमांड पहले जैसी नहीं है। लेकिन इस कारोबार की मुनाफा दर बढ़ी है। 10, 20 और 50 रुपये के नोट की बनने वाली एक हजार की माला पहले 11 सौ में बिकती थी, जो अब 12 से 15 सौ रुपये में बिक रही है। इसकी मूल वजह छोटे नोट की किल्लत बताई जा रही है। औरैया में कुछ लोग गुपचुप तरीके से इस कारोबार को कर रहे हैं।
औरैया जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक दूधनाथ ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी नियमावली में स्पष्ट उल्लेख है कि भारतीय मुद्रा का किसी भी तौर पर व्यापार नहीं किया जा सकता। मुद्रा की बनावट और उसके रख रखाव से भी छेड़छाड़ करना अपराध है। इसके अलावा करेंसी पर न तो स्टेपलर के पिन लगाए जा सकते हैं और न की कुछ लिखा जा सकता है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। मुझे जानकारी नही है कि माला की बिक्री पर रोक है या नही। लेकिन करेंसी ब्लैक नहीं की जा सकती। वह पता करके देखते है कि कैसे छोटे नोटों की करेंसी ब्लैक हो रही है।