बिधूना। सीएचसी बिधूना में एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे मरीजों को बाहर से सिरिंज खरीदनी पड़ रही है। जबकि यह सुविधा उन्हें अस्पताल की ओर से मुहैया कराए जाने के निर्देश हैं। इसके बाद भी लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
एक तो जिले के अधिकांश अस्पतालों में एंटी रैबीज के इंजेक्शन काफी समय से नहीं है। जिससे कुत्ता, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों के काटने पर लोगों को इंजेक्शन नहीं लग पा रहे हैं। इस पर लोगों को मजबूरी में बाहर से इंजेक्शन खरीद कर लगवाने पड़ रहे हैं। वहीं, जिन अस्पतालों में एंटीरेट्रोवाइरल (एआरवी) मौजूद है वहां पर सिरिंज के नाम पर मरीजों को 10 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सिरिंज न मिलने पर लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सूरजपुर निवासी हिमांशु ने बताया कि उनके पैर में कुत्ते ने काट लिया था। जिस पर वह अस्पताल एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आए थे। जहां इंजेक्शन लगवाने के लिए उनसे बाहर से सिरिंज खरीदकर लाने के लिए कहा गया। मजबूरी में बाहर से 10 रुपये खर्च कर सिरिंज लाए। तब जाकर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लग सका।
चंदरपुर निवासी पूजा ने बताया कि बंदर ने काट लिया था। बताया गया कि अस्पताल में बंदर काटने पर फ्री इंजेक्शन लगता है। इस पर इंजेक्शन लगवाने आए थे। इंजेक्शन लगाने वाले ने कहा कि अगर इंजेक्शन लगवाना है तो पहले बाहर से सिरिंज खरीद कर लाओ। इस पर बाहर से सिरिंज खरीदकर लानी पड़ी। जबकि सरकारी अस्पतालों सिरिंज भी मिलती है। इसके बाद भी बाहर से खरीदनी पड़ी।
वर्जन
सीएचसी पर कुत्ता व बंदरों के काटने से घायल 20 से 25 मरीज प्रतिदिन इंजेक्शन लगवाने आते हैं। एक बॉयल पर एक सिरिंज दी जाती है।जबकि उस एक बॉयल से पांच मरीजों को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। ऐसे में सिरिंज खत्म हो जाती है। अवधेश कुमार सिंह, चीफ फार्मासिस्ट, सीएचसी, बिधूना।