औरैया। बच्चों की लंबी आयु के लिए माताएं आज हलषष्ठी का व्रत रखेंगी। जिसमें माताएं हल चलाकर उगाए गए खाद्यान्न का सेवन न कर भगवान गणेश व माता गौरी की पूजा-अर्चना कर अपने बच्चों के स्वास्थ्य व दीर्घायु होने की कामना करेंगी।
हलषष्ठी को बलराम जयंती भी कहते हैं। इसे कई जगह हल छठ, पीन्नी छठ या खमर छठ भी कहते हैं। हिंदू धर्म में हर व्रत व त्योहार का विशेष महत्व है। इन्हीं त्योहारों में एक हल षष्ठी व्रत है। आचार्य केशवम् अवस्थी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी का व्रत रखा जाता है। इस साल हल षष्ठी का व्रत पांच सितंबर मंगलवार को रखा जाएगा। यह व्रत सुहागन महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और बुद्धिशाली होने के लिए रखती हैं। इस व्रत का विशेष महत्व होता है। हल षष्ठी के व्रत में भगवान गणेश व माता गौरी की पूजा का विशेष महत्व हैं।
पूजा करने की विधि
हल षष्ठी के व्रत के दिन पूजा करने के लिए घर में मौहा के पत्तों में भैंस के गोबर से छठ माता की तस्वीर बनाते हैं। इस दिन भगवान गणेश व माता गौरी की पूजा की जाती है। उसके बाद गणेश और माता गौरा की पूजा करते हैं। इस व्रत में महिलाएं घर में ही तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी और कांसी के पेड़ लगाती हैं और वहां पर बैठकर विधि विधान से पूजा करती हैं और हल षष्ठी की कथा सुनती हैं।