औरैया। खेल का मैदान व क्रिकेट कोच न होने से खिलाड़ियों को मायूसी हो रही है। युवाओं का कहना है कि वे किसी तरह गली-कूचों व खाली पड़े खेतों में खेलकर ही अभ्यास कर पाते हैं। घंटों अभ्यास के बाद भी वे दक्ष नहीं हो पा रहे हैं।
जिले में युवाओं के लिए खेल के मैदान व प्रशिक्षक न होने के चलते युवाओं की प्रतिभा चमक नहीं पा रही है। जिले में एक भी ठीक-ठाक मैदान तैयार नहीं है। ऐसे में टेनिस बॉल से अपना अभ्यास कर स्वयं ही क्षेत्रीय टूर्नामेंट आयोजित कर अपनी प्रतिभा को निखारने का प्रयास करते हैं। इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक से लेकर सभी भूमिका स्वयं युवा ही निभाते हैं। तकनीकी रूप से स्वयं को दक्ष बनाने के लिए युवाओं को मजबूरन कानपुर, लखनऊ, दिल्ली आदि का रुख करना पड़ता है। दूसरे शहरों में जाकर तैयारी करने में युवाओं को प्रति माह मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
बीहड़ क्षेत्र के गंगदासपुर निवासी खिलाड़ी अभिषेक राठौर ने बताया कि क्षेत्र में बहुत से गांवों में तो खेल के मैदान भी मौजूद नहीं है। जिसके चलते युवाओं को क्रिकेट खेलने के लिए स्कूलों या फिर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है। जिम्मेदार युवाओं के खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर चुप्पी साधे रहते हैं।
बिधूना निवासी युवा अभिषेक त्रिवेदी ने बताया कि क्षेत्र में वर्ष 2020 में जिला स्तरीय स्टेडियम का निर्माण शुरू हुआ था। तय समय सीमा बीते हुए एक साल गुजर गई लेकिन निर्माण पूरा नहीं हो सका है। अच्छे मैदान में खेलने के समय खिलाड़ियों को ज्यादा समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।