औरैया। जिले में किसानों ने सरसों, गेहूं, मटर, चना आदि की बुवाई करना प्रारंभ कर दिया है। ऐसे में समितियों के साथ इफकों केंद्रों पर खाद न होने से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सहकारिता विभाग के आंकड़ों की माने तो जिले की करीब 68 गोदामों में 30 पर ही खाद उपलब्ध है।
सहायक निबंधक सहकारिता विजय प्रकाश वर्मा ने बताया कि किसान डीएपी की जगह एनपीके का प्रयोग कर सकते हैं। एनपीके का प्रयोग करने से जहां मिट्टी की सेहत सुधरेगी, वहीं फसल की पैदावार अधिक होगी। इस खाद में चार पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ ही सल्फर की मात्रा भी उपलब्ध है। वहीं डीएपी में दो ही पोषक तत्व होते हैं। एनपीके खाद डीएपी से सस्ती भी है। उन्होंने बताया कि 68 सहकारी समितियों में 30 पर डीएपी उपलब्ध है। विभाग के पास 400 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। जिसे समितियों पर भेजा जा रहा है। 22 नवंबर को 1300 मीट्रिक टन डीएपी की रैक और जिले को मिलेगी।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया की कृषि विभाग के पास 2066 मीट्रिक टन डीएपी, 16227 मीट्रिक टन यूरिया, 672 मीट्रिक टन एसएसपी, 301 मीट्रिक टन एमओपी और 1807 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। खाद की कोई किल्लत नहीं है। यदि कोई दुकानदार मंहगी दरों पर उर्वरक बेंच रहा है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।