औरैया। बाजरा की फसल को लाल कीड़े चट कर रहे है। पत्ती से लेकर बाली तक कीड़े पहुंच चुके हैं। फसल को कीड़ों से सुरक्षित करने के लिए किसान कीटनाशक का प्रयोग भी कर रहे, लेकिन कोई विशेष परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा। किसानों की माने तो इस बार कम बारिश के चलते लाल कीड़ों का प्रकोप ज्यादा है। ऐसे में उत्पादन गिरने की संभावना है।
जिले में वर्ष 2022 में बाजरे का रकबा 33 हजार हेक्टेयर था। इस बार प्रचार-प्रसार ठीक होने व श्रीअन्न(मोटे अनाज) को बढ़ावा मिलने पर जिले में बाजरा का रकबा 34 हजार हेक्टेयर हुआ है। ऐसे में बाजरे की फसल पर दांव लगाने वाले किसानों के माथे पर लाल कीड़ों के चलते चिंता की लकीरें है। एक ओर जहां बाजरे की सूख रही फसल को सींचने की जद्दोजहद चल रही है, वहीं दूसरी ओर किसान लाल कीड़े से निपटने के लिए कीटनाशक की खरीदा कर बचाव में जुटे हैं। किसानाें का मानना है कि लाल कीड़ों के प्रकोप से उत्पादन गिरता है तो बाजरे की फसल घाटे की सौदा भी बन सकती है। ऐसे में किसान चितिंत है। सहायल क्षेत्र के गांव भटौली, शिवगंज, सौथरा, करियापुर, पौंथी समेत कई गांवों में लाल कीड़े का प्रकोप है। किसान अनिल मिश्रा, अमित भदौरिया, उमेश सिंह, कैलाश नारायण, रामकुमार, मुलायम सिंह ने बताया कि लाल कीड़ बाजरे की फसल में लग जाने से पौधा पीली पढ़ जा रहा है। बारिश होने पर कीड़ों का प्रकोप खत्म हो जाता है। इस बार बारिश कम होने से प्रकोप ज्यादा है। कीटनाशक दवा का प्रयोग करने के बाद भी कीड़ों की समस्या दूर नहीं हो पा रही है।
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ऐसे करें लाल कीड़ों से बाजरे की फसल का उपचार
कृषि विज्ञान केंद्र ग्वारी के वैज्ञानिक अनंत कुमार ने बताया कि सितंबर माह के अंत में बाजरे की फसल में बाली आनी शुरू होती है। ऐसे में कीड़ों का प्रकोप बढ़ता है। जरा सी लापरवाही उत्पादन में भारी गिरावट ला सकती है। बारिश होने पर कीड़े खत्म हो जाते हैं। बारिश के अभाव में कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कर फसल को कीड़ों से सुरक्षित किया जा सकता है। किसान क्लोरोफारिफॉस व सायफरमेथिरीन (कोरंडा) की 250 ग्राम मात्रा 100 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ फसल में छिड़काव करते हुए कीड़ों से फसल बचा सकते हैं। एक सप्ताह के अंदर फसल का पीलापन दूर हो जाएगा।
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कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि बाजरे की फसल में लाल कीड़े के प्रकोप को देखते हुए किसान सेवा केंद्रों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। खाद व कीटनाशक दवा विक्रेता किसानों को लाल कीड़े से निपटने व पहचान करने की बारीकी समझा रहे हैं। वहीं वाट्सएप नंबर पर फसल की फोटो खींचकर मंगवाई जा रही है। जिला कार्यालय में फोटो के आधार पर उपचार की जानकारी संबंधित किसान तक पहुंचाई जा रही है। वहीं कृषि विभाग की टीम को संबंधित गांवों में किसानों से संवाद व फसलों के निरीक्षण के भी निर्देश दिए गए हैं।