औरैया। डीएम के पूर्व ओएसडी ने साल 2000 में सदर एसडीएम के स्टेनो रहने के दौरान पत्नी को पट्टा दिलवाया। डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने संज्ञान लिया तो ओएसडी को हटाते हुए एडीएम कार्यालय में संबद्ध किया। वहीं अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राम औतार को जांच सौंपी। रिपोर्ट आने के बाद पट्टा निरस्त करने के साथ ही वाद भी दर्ज करा दिया गया है।
जिला प्रशासन को मिली शिकायत में कहा गया था कि डीएम के पूर्व ओएसडी राजकुमार ने सदर एसडीएम के स्टेनो रहने के दौरान अपनी पत्नी गीता के नाम पट्टा जमीन का पट्टा करा लिया। सुमोटो के तहत यह पट्टा हुआ था। एक माह बाद वैसुंधरा में भी पट्टे कराने का प्रयास किया गया। मामले में डीएम ने पिछले दिनों संज्ञान लेते हुए राजकुमार को ओएसडी पद से हटा कर एडीएम कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया। साथ ही इसकी जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राम औतार को सौंपी गई। उनकी रिपोर्ट पट्टा आवंटन अवैध पाया गया। जिसके बाद आवासीय जमीन आवंटन को निरस्त कर दिया गया है। वहीं मामले को लेकर वाद भी दर्ज करा दिया गया है। खास बात यह है कि पट्टा मिलते ही सेहुद की इस जमीन को बेच दिया गया था। इस पर अछल्दा निवासी एक युवक ने मकान भी बना लिया है। बेशकीमती जमीन के हुए इस खुलासे में सरकारी पद पर रहते हुए राजकुमार की पत्नी को यह लाभ दिया गया। अब इस कड़ी में राजकुमार की पत्नी को पट्टा आवंटन में अधिकारियों की संलिप्तता की जांच एडीएम महेंद्र पाल सिंह को सौंपी गई है।
अधिकारियों के संलिप्तता की भी होगी जांच
‘अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के बाद वाद दर्ज कर लिया गया है। वहीं पूर्व ओएसडी समेत तत्कालीन अधिकारियों के पट्टा आवंटन में संलिप्तता को लेकर एडीएम को जांच सौंपी गई है। सरकारी पद के दुरुपयोग के बिंदुओं की भी जांच होगी।
’-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिलाधिकारी औरैया