औरैया। डीएम के ओएसडी राजकुमार ने साल 2000 में सदर तहसील में स्टेनो रहने के दौरान सेहुद व वैसुंधरा ग्राम पंचायत में पत्नी के नाम आवासीय पट्टा करा लिया था। मामले में डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने राजकुमार को ओएसडी पद से हटाते हुए एडीएम कार्यालय में संबद्ध किया है। वहीं पूरे मामले में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामऔतार को जांच सौंपी गई है।
अमर उजाला के 26 व 27 जुलाई के अंक में बारी-बारी डीएम के ओएसडी राजकुमार के सदर तहसील में स्टेनो रहने के दौरान पत्नी गीता के नाम पट्टा कराने का मामला उजागर किया गया। सरकारी कर्मचारी से लेकर एक ही शख्स के दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों में आवासीय पट्टा कराने में राजस्व मानकों को ताक पर रखा गया है। मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने राजकुमार को ओएसडी पद से हटाते हुए एडीएम कार्यालय में संबद्ध किया है।
वहीं राजकुमार की जगह पर राजेश यादव को ओएसडी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन पट्टों को लेकर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी गई है। डीएम की इस कवायद के बाद सरकारी महकमों चर्चा का दौर जारी रहा। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि डीएम के आदेश पर उनके ओएसडी राजकुमार को हटा दिया गया है। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामऔतार को जांच सौंपी गई है। जांच होने तक एडीएम कार्यालय में राजकुमार को संबद्ध किया गया है।