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Auraiya News: दिल का दौरा पड़ने पर मददगार साबित होगी डिफाइब्रिलेटर मशीन

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औरैया। अचानक से दिल का दौरा पड़ने पर समय रहते जिला अस्पताल में इलाज मिलेगा। शासन से 100 शैया अस्पताल को तीन डिफाइब्रिलेटर मशीनों की सौगात दी गई है। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी। मेडिकल कॉलेज (100 शैया अस्पताल) में इसका संचालन शुरू करा दिया गया है।
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अक्सर सुनने को मिलता है कि नाचते-नाचते या जिम में कसरत करने के दौरान अचानक से मौत हो गई। इन मौतों के पीछे अचानक से दिल का रुक जाना होता है, जिसे कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। लोगों को दिल का दौरा पड़ने पर अब लोगों को समय पर उपचार की सुविधा जिले में ही मिलेगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि आम तौर पर लोगों के सामने हंसते-हंसते या फिर कुछ काम करने के दौरान लोगों की अचानक से मौत हो जाती है। इसके पीछे उनके दिल की धड़कनें रुक जाना रहता है। यदि मरीज को सही समय पर उपचार दिया जाए तो उसे कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीआरपी) प्रक्रिया से पुनर्जीवित किया जा सकता है।
डिफाइब्रिलेटर एक विशेष उपकरण को संदर्भित करता है जो हृदय की लय में परिवर्तन का पता लगाने और आवश्यक होने पर दिल को बिजली का झटका देने में सक्षम होता है। इस झटके में साइनस लय को फिर से स्थापित करने की क्षमता होती है। यदि किसी युवक को दिल का दौरा पड़ा हो उसे एक से दो मिनट के अंदर डिफाइब्रिलेशन के जरिए बचाया जा सकता है। गुरुवार को शासन की ओर से 100 शैया जिला अस्पताल में तीन डिफाइब्रिलेटर मशीनें भेजी गईं। जिन्हें संबंधित कंपनी के इंजीनियर ने अस्पताल में अलग-अलग स्थानों पर स्थापित कर संचालन शुरू किया। सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि एक मशीन इमरजेंसी वार्ड, एक मशीन प्रसव कक्ष के पास बने ऑपरेशन थ्रियेटर व एक को एसएनसीयू वार्ड में स्थापित कराया गया। मशीनों के स्थापित हो जाने से अब जिले में भी डिफाइब्रिलेशन की सुविधा शुरू हो गई है। इस सुविधा से जिले में दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों का आंकड़ा कम होगा।
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सीएमओ ने अस्पताल में परखीं व्यवस्थाएं

सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. अरविंद कुशवाहा, सीएमएस डॉ कुलदीप यादव ने निरीक्षण कर स्वास्थ्य उपकरणों की जांच कर संचालन शुरू करवाया। इसके साथ ही सफाई से अन्य व्यवस्थाओं को भी चाकचौबंद कराया। प्राचार्य डॉ. अरविंद कुशवाहा ने बताया कि इस समय 100 शैया अस्पताल में डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है। जो कि मेेडिकल कॉलेज के संचालन होने के साथ कम हो जाएंगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा। गुरुवार देर शाम तक अस्पताल के वार्ड, इमेरजेंसी, ओपीडी की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाती रही।
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